सोनभद्र : समय के पक्के दिखे एसएसए दफ्तर के कर्मचारी, काम की अधिकता के कारण कई बार कर्मियों को जाना पड़ता है बाहर, हाल सर्वशिक्षा अभियान कार्यालय राबर्ट्सगंज का, अधिकारियों की यहां दिखती है हनक

जागरण संवाददाता, सोनभद्र : सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय राबट्र्सगंज नगर में ही है। जिला मुख्यालय पर कार्यालय होने के कारण यहां के कर्मी ड्यूटी के पक्के हैं। कभी-कभार काम की अधिकता के कारण देरशाम को घर जाते हैं तो सुबह आने में देर हो जाती है। यह खुलासा तब हुआ जब बुधवार को दैनिक जागरण की टीम करने के लिए सुबह दस बजे सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय पहुंची। टीम ने यहां कर्मचारियों का उपस्थिति रजिस्टर देखने के साथ ही मौजूदगी भी देखी। यहां तैनात नौ कर्मचारियों में सभी उपस्थित मिले और काम में व्यस्त रहे। 

राबट्र्सगंज के मुख्य बाजार से सटे दरोगाजी की गली में स्थित कार्यालय में जब टीम पहुंची तो वहां बाहर वाले कमरे में यूनिफार्म वितरण, किताब वितरण के समन्वयक व अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। वहीं पास की कुर्सी पर बैठी बालिका शिक्षा की समन्वयक उपस्थिति रजिस्टर हाथ में लिये उपस्थिति बना रहीं थी। जब जागरण टीम के कैमरे का फ्लैश चमका तो थोड़ी देर के लिए कार्यालय के कर्मी घबड़ा गए। उधर, कंप्यूटर कक्ष में मौजूद कर्मी अपनी-अपनी कुर्सी पर भी मौजूद नहर आये। इसी कक्ष में एमडीएम की भी व्यवस्था संचालित की जाती है। वहां एमडीएम से जुड़े समन्वक व एक अन्य कर्मी भी मौजूद मिले। टीम जब बाहर निकली तो ठीक सामने वाला कक्ष साक्षरत भारत मिशन का था। उसमें दो जिला समन्वयक मौजूद मिले। 1प्रमुख सचिव के साथ गये थे बीएसए: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कमरे की तरफ जब टीम ने रुख किया तो पता चला कि बीएसए डा. गोरखनाथ पटेल प्रमुख सचिव के साथ क्षेत्रीय भ्रमण पर गये हैं। बताया गया कि यहां बीएसए दूसरी पाली में बैठते हैं। पहली पाली में उरमौरा स्थित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बैठकर लोगों की समस्या सुनते हैं। 

अधिकारियों की यहां दिखती है हनक : सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय में टाइम टू टाइम उपस्थिति के बारे में बताया जाता है कि यहां पूर्व में एक बार जिले के किसी आला अधिकारी ने निरीक्षण किया था। उस निरीक्षण में कई लोग अनुपस्थित पाये गये थे। तब से यहां के लोग राइट टाइम हो गये हैं। यहां के लोग ड्यूटी समय में काम करते हैं।1 हां इतना जरूर है कि जरूरी काम पड़ने पर थोड़ी देर के लिए बाजार में चले जाते हैं। बाजार से सटा होने के कारण इनका काम भी हो जाता है और बहुत अधिक समय भी नहीं लगता।

सोनभद्र : विद्यालय में गड़बड़ी देख भड़के प्रमुख सचिव, जिले के नोडल अधिकारी संजय ने किया औचक निरीक्षण, विद्यालयों की समस्याओं को जल्द सुधारने का निर्देश : डीएम

जागरण संवाददाता, सोनभद्र : प्रमुख सचिव चीनी उद्योग व गन्ना विकास विभाग तथा जिले के नोडल अधिकारी संजय आर भूस रेड्डी ने बुधवार को प्राथमिक विद्यालय लोहरा, उच्च प्राथमिक विद्यालय लोहरा, आंगनबाड़ी केंद्र लोहरा आदि का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान गड़बड़ी देख भड़क गए। 1 प्रमुख सचिव ने प्राथमिक विद्यालय लोहरा के निरीक्षण के दौरान स्कूल परिसर में स्थापित हैंडपंप के पास जल जमाव को देखा और संबंधितों को जल निकासी के लिए नाली बनाये जाने के निर्देश दिया। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय लोहरा के बच्चों से मिले और उनका बौद्धिक परीक्षण किया। उन्होंने बारी-बारी से कक्षा एक से लेकर पांच तक के सभी क्लास रूम में जाकर बच्चों को दी जा रही शिक्षा के बारे में जाना। 1बच्चों से उन्होंने पहाड़ा सुना, सामान्य ज्ञान की बातें की और उन्हें मुहैया कराये जा रहे मध्याह्न भोजन, निश्शुल्क ड्रेस, निश्शुल्क किताब आदि के बारे में जानकारी की। उन्होंने प्रधानाध्यापक व ग्राम प्रधान की क्लास लेते हुए बेहतर साफ-सफाई रखने का निर्देश दिया। 1उच्च प्राथमिक विद्यालय लोहरा के जांच में शौचालय की दशा खराब पाये जाने पर तत्काल सुधार का निर्देश दिया। उन्होंने रसोई घर में बनाये जा रहे खाने के सामान की जांच की। बुधवार को दिए जाने वाले दूध को प्रथमदृष्टया चखकर देखा और पाया कि दूध में काफी पानी है। दूध के क्वालिटी में सुधार के निर्देश दिये। मध्याह्न भोजन को भी चखकर देखा और बेहतर गुणवत्ता बनाये रखने का निर्देश दिया। श्री रेड्डी ने संबंधितों के खिलाफ लिखा-पढ़ी का निर्देश अधिकारियों को दिया। 1 आंगनबाडी केंद्र लोहरा में नामांकित 58 बच्चों के सापेक्ष जांच के दौरान महज नौ बच्चे मिले। जिसको नोडल अधिकारी ने गंभीरता से लिया। आंगनबाड़ी केंद्र में दो कार्यकर्ता कमला मौर्या व रीता कुमारी की तैनाती है, जिसमें से मौके पर कमला मौर्या मौजूद मिलीं और रीता कुमारी को टीकाकरण कार्य में जाना बताया गया। केंद्र के सामने व्यापक स्तर पर गंदगी देख नोडल अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। 

समस्त परिषदीय विद्यालयों के प्र0अ0 को 2 सप्ताह के भीतर रंगाई पुताई एवं परिसर की सफाई पूर्ण कराये जाने हेतु बीईओ द्वारा निर्देशित किये जाने के सम्बन्ध में शिक्षा निदेशक (बेसिक) का आदेश जारी



कार्यरत अप्रशिक्षित शिक्षकों की मांग पर NIOS से ऑनलाइन डीएलएड कोर्स में नामांकन कराने का एक और मौका : 07 नवम्बर तक करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन : देखें विज्ञप्ति।



पहली बार सरकार कराएगी एप आधारित विज्ञान प्रतिभा खोज परीक्षा, पाठ्यक्रम और एप ऑनलाइन उपलब्ध

नई दिल्ली: विद्यार्थियों के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए सरकार मोबाइल एप के जरिये एक राष्ट्रव्यापी विज्ञान प्रतिभा खोज परीक्षा का आयोजन करेगी। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आइटी राज्यमंत्री अल्फोंस जोसेफ कन्ननथनम ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि दुनिया में पहली बार सरकार इतनी बड़ी संख्या में लोगों की एप आधारित परीक्षा लेने जा रही है। 

विद्यार्थी विज्ञान मंथन (वीवीएम) मोबाइल एप लांच करते हुए कन्ननथनम ने कहा, ‘91,000 विद्यार्थियों ने अभी तक पंजीकरण (राष्ट्रीय विज्ञान प्रतिभा परीक्षा) कराया है। हम देशभर में 2078 केंद्रों पर परीक्षा का आयोजन करेंगे।’ परीक्षा का आयोजन 26 नवंबर को किया जाएगा। परीक्षा दो वर्गो में कराई जाएगी। पहला वर्ग जूनियर कक्षाओं (कक्षा 6 से 8) का और दूसरा वर्ग सीनियर कक्षाओं (कक्षा 9 से 12) का है। इसका पाठ्यक्रम ऑनलाइन उपलब्ध है।

वेतन के आधार पर तय होगा मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसे में मौत पर मुआवजे का तय किया मानक

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में मुआवजे को लेकर नए मानक तय किए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा है कि आश्रितों को मुआवजा देते समय मृतक के भविष्य की संभावनाओं पर भी होगा। 1चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष सवाल था कि क्या सड़क दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के आश्रित भावी संभावना के एवज में मृतक को मिलने वाले वेतन का एक निश्चित हिस्सा मुआवजा राशि में जुड़वा सकते हैं। 

★ कहा, मृतक के भविष्य की संभावनाओं पर भी होगा विचार
★ संपत्ति नुकसान से अंतिम संस्कार तक की व्यवस्था
 ये हैं मानक
● यदि मृतक के पास स्थायी नौकरी थी और वह 40 वर्ष से कम आयु का था तो शेष वेतन का 50 फीसद हिस्सा मुआवजे में जुड़ेगा
● आयु 40 से 50 साल के बीच हो तो 30 फीसद जोड़ा जाएगा
● अगर आयु 50 से 60 साल के बीच हुई तो 15 फीसद जुड़ेगा 
● स्वरोजगार या निजी क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति के मामले में भी यही व्यवस्था
● लेकिन संभावित आय का 40, 25 और 10 फीसद ही जोड़ा जाएगा


संविधान पीठ ने कहा कि यदि मृतक के पास स्थायी नौकरी थी और वह 40 वर्ष से कम आयु का था तो आमदनी का निर्धारण करते समय उसकी भावी संभावना के रूप में उसके वास्तविक वेतन का 50 फीसद हिस्सा मुआवजे में जुड़ेगा। वास्तविक वेतन की गणना करों के बगैर होगी। संविधान पीठ ने स्वरोजगार या निजी क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति के मामले में भी इसी तरह की व्यवस्था दी है।
संविधान पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लि. की याचिका पर यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि क्लेम याचिका में परिजनों को आश्रितों की संख्या के साथ मृतक की उम्र व आय को प्रमाणित करना होगा। 49 पेज के फैसले में चीफ जस्टिस की बेंच ने संपत्ति का नुकसान, जीवन साथी के बिछड़ने व अंतिम संस्कार के लिए भी रकम तय की है। यह क्रमवार 15, 40 व 15 हजार होंगी। इस राशि में हर तीन साल में दस फीसद की बढ़ोतरी की जाएगी।

बाल विवाह और काम की मजबूरी के चलते बच्चे छोड़ रहे स्कूल, एक स्टडी सर्वे में आये परिणाम।



परीक्षा की सुचिता बनाए रखने के लिए होगा तकनीकी का उपयोग सीसीटीवी कैमरे से लेकर वाट्सअप से होगी परीक्षा की निगरानी

लखनऊ। निज संवाददाताप्रदेश में पॉलीटेक्निक की विषम सेमेस्टर परीक्षा की सुचिता बनाए रखने के लिए प्राविधिक शिक्षा परिषद तकनीकी का उपयोग करेगा। इसमें सीसीटीवी कैमरे लगायें जायेंगे साथ ही केन्द्र अधीक्षक, शासन के अधिकारी और अन्य सम्बन्धित लोग व्हाटसएप के जरिये एक दूसरे के सम्पर्क में रहेंगे। साथ ही संवेदनशील निजी पॉलीटेक्निकों के केन्द्र अधीक्षक राजकीय पॉलीटेक्निक के वरिष्ठ शिक्षक बनेंगे। इसके अलावा परिषद ने जिलाधिकारी की संस्तुति पर परीक्षा केन्द्र बनाए हैं। करीब पांच सौ से अधिक सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी पॉलीटेक्निक की विषम सेमेस्टर परीक्षाएं 9 दिसम्बर से शुरू हो रही हैं। इसके लिए परिषद अपनी पूरी तैयारी में जुटा हुआ है। प्राविधिक शिक्षा परिषद के सचिव एसके सिंह ने बताया कि पॉलीटेक्निक परीक्षा केन्द्र के हर कमरे में सीसीटीवी कैमरे निगरानी में परीक्षा होगी। उन्होंने बताया कि पहले, दूसरे, तीसरे और पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा के साथ ही स्पेशल बैक पेपर परीक्षा भी होगी। निजी पॉलीटेक्निक के लिए अलग से पर्यवेक्षक भी नियुक्त किए गए हैं। नकल पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक जोन में एक उड़न दस्ता तैनात रहेगा। इसमें विभागाध्यक्ष स्तर के तीन सदस्य होंगे। इसके अलावा जोन में उच्च स्तर के अधिकारी की विशेष टीम पर्यवेक्षक का काम करेगी। परीक्षा पूरी होने के बाद प्रत्येक परीक्षा केन्द्र को सीसीटीवी की रिकार्डिंग परिषद को भेजना जरूरी है। -------------------------------------------------------पूरे प्रदेश में 250 परीक्षा केन्द्र सचिव एके सिंह ने बताया कि परीक्षा के लिए 250 परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं। इन पर करीब 2.07 लाख विद्यार्थी दो पॉलियों में परीक्षा देंगे। पहली पॉली सुबह 9 से 11.30 बजे तक और दूसरी पॉली दोपहर 2 से 4.30 बजे तक होगी। ------------------------------------------------------- संवेदनशील केन्दों पर केन्द्र अधीक्षक होंगे राजकीय पॉलीटेक्निक के शिक्षकपरिषद ने सुचारू रूप से परीक्षा कराने के लिए संवेदनशील निजी पॉलीटेक्निक के परीक्षा केन्द्र का अधीक्षक राजकीय पॉलीटेक्निक के वरिष्ठ शिक्षक को बनाने का फैसला लिया है। ऐसा पहली बार होगा। साथ में पर्यवेक्षक भी होंगे।

हर कॉलेज से जुड़ेगा विद्यालक्ष्मी पोर्टल एजूकेशन लोन के लिए अधिक से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ने की कवायद यूजीसी की ओर से सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पत्र जारी

इलाहाबाद : कोई गरीब या मध्यम वर्गीय परिवार से जुड़ा छात्र उच्च शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विद्यालक्ष्मी पोर्टल सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की वेबसाइट से जोड़ने के निर्देश जारी किए हैं। इस पोर्टल के जरिए छात्र एजूकेशन लोन के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं और लोन के लिए आवेदन भी कर सकते हैं। हालांकि, इस पोर्टल की शुरुआत दो साल पहले ही हो चुकी है, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने न आने के बाद इसे सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के साथ जोड़ने का निर्णय लिया गया है।
विद्यालक्ष्मी पोर्टल देश का पहला ऐसा पोर्टल है, जिसे केंद्रीय वित्त मंत्रालय, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने मिलकर तैयार किया है। इस पोर्टल (www.vidyalakshmi.co.in) की शुरुआत ई-गवर्नेंस के तहत प्रधानमंत्री ने मुंबई में 15 अगस्त 2015 को की थी। विद्यार्थियों को पैसे की कमी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न रहना पड़े, इसी उद्देश्य के साथ इस पोर्टल की शुरुआत की गई थी। हालांकि, इसका व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार नहीं हो सका और सफलता आशानुरूप नहीं मिली। अब यूजीसी की ओर से विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र जारी कर कहा गया है कि इस पोर्टल के महत्व को देखते हुए विश्वविद्यालय, सभी महाविद्यालय और अन्य उच्च शिक्षण संस्थान अपनी वेबसाइट के होम पेज पर विद्या लक्ष्मी पोर्टल के बारे में जानकारी दें और इस जानकारी को उचित स्थान पर प्रदर्शित करें।

विद्यालयों में मनाया गया राष्ट्रीय एकता दिवस

इलाहाबाद: सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर मंगलवार को केंद्रीय विद्यालयों, पतंजलि ऋषिकुल विद्यालय में राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट तथा पंतजलि ऋषिकुल में प्रतियोगिताएं र्हुइं। केंद्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट में कार्यक्रम की शुरूआत वल्लभ भाई पटेल के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। डॉ. चंद्रमौलि त्रिपाठी ने विद्यार्थियों एवं अध्यापकों को एकता की शपथ एवं राष्ट्र के प्रति एकनिष्ठा का संकल्प दिलाया। आरके पटेल ने वल्लभ भाई पटेल के जीवन कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा की। इस मौके पर एकता दौड़ हुई,  जिसे अध्यक्ष मेजर तरुणा ठाकुर ने झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिता भी हुई। इसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में पीएन उपाध्याय, नीरज श्रीवास्तव, प्रवेश कुमार, अभय सिंह, एसपी सचान, डीएस नवीन, के सिंह, एएन मिश्र, आशीष, डीपी त्रिपाठी, अचिन एवं बीके झा ने सहयोग किया।
केंद्रीय विद्यालय एएफएस मनौरी में हुए एकता दिवस समारोह में छात्रों ने सरदार वल्लभ भाई पटेल के सुविचार एवं जीवन-वृत्त को प्रस्तुत किया। अंग्रेजी शिक्षक जेके त्रिपाठी एवं केके सिंह ने सरदार पटेल के बारे में बताया। शिक्षक एवं विद्यालयों ने एकता की शपथ ली। एकता दौड़ भी हुई। कार्यक्रम में प्रभारी प्राचार्य केके सिंह, शिक्षक विनोद सिंह, आरके पटेल, शरद कुमार वर्मा, पीएन तिवारी, विजय यादव, आदित्य पाल आदि मौजूद थे। पतंजलि ऋषिकुल विद्यालय में इस मौके पर अंतर्सदनीय कक्षा एक के विद्यार्थियों के लिए कविता पाठ, कक्षा दो से से चार तक के विद्यार्थियों के लिए नैतिक मूल्याधारित लघु नाटिका एवं पांचवीं के विद्यार्थियों के लिए आशुभाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई।  कविता पाठ में अथर्व, शौर्यवर्धन, शुभा चौरसिया क्रमश पहले, दूसरे एवं तीसरे स्थान पर रहे, जबकि शौर्य सिंह प्रशंसनीय रहे। नैतिक मूल्याधारित लघु नाटिका में सलिल सदन, आकाश सदन, पवन सदन तथा आशुभाषण में प्रखर भारद्वाज, अविरल, दिव्यांश सक्सेना-श्रेया क्रमश: पहले, दूसरे एवं तीसरे स्थान पर रहे। इस मौके पर निदेशक सर गुणे, समन्वयक अपर्णा मन्ना मौजूद थीं। प्रतियोगिता की निर्णायक रंजना श्रीवास्तव एवं साधना चौबे थीं।

इलाहाबाद आदर्श शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में परिषदीय एवं माध्यमिक विद्यालयों में मंगलवार को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। इस दौरान सरदार पटेल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा हुई। इनके साथ आचार्य नरेंद्र देव के जीवन पर भी प्रकाश डाला गया। सुबह प्रभातफेरी भी निकाली गई। एसोसिएशन कार्यालय में रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया गया। इसके बाद हुई बैठक में सरदार पटेल एवं नरेंद्र देव के जीवन पर चर्चा हुई। अध्यक्षता डॉ.रूद्र प्रभाकर मिश्र तथा संचालन डॉ.गीतारंजन ने किया। इसमें अरविंद पांडेय, डॉ.जेएन मिश्रा, डॉ.नीलम ओझा, भारत भूषण आदि मौजूद थे। 

केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (ठकुराई गुट) की नई इकाई का गठन किया गया। इसमें वरिष्ठ प्रवक्ता वृजलाल को अध्यक्ष, सुधीर कुमार शुक्ला को उपाध्यक्ष, कमलेश कुमार पुष्कर को मंत्री, ममता तिवारी को उपमंत्री तथा सत्य प्रकाश सिंह को कोषाध्यक्ष चुना गया।

बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बाबुओं की मनमानी के खिलाफ शिक्षकों के मोर्चा खोलने का असर हुआ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने इन बाबुओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद बीएसए संजय कुशवाहा ने मंगलवार को तीन वरिष्ठ सहायकों वीरेंद्र चौधरी, राम शंकर मिश्र, सुरेश चंद्र शर्मा तथा वरिष्ठ लिपिक दिनेश कुमार पांडेय का पटल परिवर्तन कर दिया।

देव दीपावली के अवसर पर चार नवंबर को संगम क्षेत्र में होने वाले कार्यक्रम में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक भी शामिल होंगे। इस संबंध में बीएसए संजय कुशवाहा ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को मंगलवार को आदेश जारी किया। उनसे कहा गया कि चार नवंबर को दिन में साढ़े तीन बजे सौ-सौ शिक्षकों के साथ संगम क्षेत्र में उपस्थित हों। प्रत्येक शिक्षक को 10-10 मिट्टी के दीप, बाती, तेल/मोमबत्ती के साथ आना होगा।

डीएम ने लगाई बीएसए को फटकार कोरांव में अवैध स्कूलों पर बीएसए को फटकार डीएम ने मौके पर किया शिकायतों का निस्तारण

इलाहाबाद। जिले के दूर-दराज से आने वाले फरियादियों की शिकायतों का जिलाधिकारी मौके पर ही निस्तारण कर रहे हैं। नए जिलाधिकारी ने पदभार ग्रहण करने के बाद लगातार जनता की शिकायतें सुनकर उनका मौके पर ही निस्तारण कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने कोरांव में अवैध रूप से चल रहे 93 स्कूलों की शिकायत पर बीएसए पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें इस पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। झूंसी की अनीता की अवैध कब्जे की शिकायत पर डीएम ने सीओ फूलपुर को निर्देश दिया कि मौके पर जाकर अवैध कब्जे को तत्काल मुक्त कराएं। उन्होंने मेजा में तालाब हो रहे कब्जे की शिकायत पर तहसीलदार मेजा को निर्देश दिया कि प्रकरण को तुरंत निस्तारित करें।

करीब सवा सौ शिक्षकों की नौकरी पर खतरे की तलवार, इस यूनिवर्सिटी से ली फर्जी डिग्री

कानपुर : यूपी के फतेहपुर जिले में कार्यरत करीब सवा सौ शिक्षकों की नौकरी पर खतरे की तलवार लटक गई है। आगरा यूनिवर्सिटी से बीएड कर शिक्षक बनने वालों की छंटनी शुरू हो गई है। शासन से आई ऐसे शिक्षकों की सूची से जिले में कार्यरत शिक्षकों से मिलान किया जा रहा है।

आगरा यूनिवर्सिटी से बीएड की फर्जी डिग्री लेकर पूरे प्रदेश में करीब सात हजार शिक्षक बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे थे। कोर्ट ने ऐसे सभी शिक्षकों की सेवा खत्म कर विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को फर्जी डिग्रीधारक इन शिक्षकों की सूची की सीडी बीएसए कार्यालय को प्राप्त हुई है।

सूत्रों की मानें तो पूर्व में इस यूनिवर्सिटी के डिग्री धारक करीब सवा सौ शिक्षक चिह्नित हुए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण कार्रवाई नहीं हो पाई थी। अब बीएसए कार्यालय में ऐसे शिक्षकों की खोज तेजी से शुरू हो गई है। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शासन से सोमवार को सूची प्राप्त हुई है।

पटल प्रभारी को जिले में कार्यरत ऐसे शिक्षकों को चिह्नित करने के लिए सूची दे दी गई है। करीब चार हजार शिक्षकों में आगरा यूनिवर्सिटी के डिग्रीधारक शिक्षक को चिह्नित करने में कुछ समय जरूर लगेगा, लेकिन जल्द ही फर्जी अभिलेखों से नौकरी करने वाले शिक्षक बर्खास्त होने के साथ ही जेल जाएंगे।

आधार लिंक करना अनिवार्य

फतेहपुर। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों का आधार लिंक होना अनिवार्य कर दिया गया है। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सभी शिक्षक मानव संपदा के आंकड़ों की लोडिंग के साथ अनिवार्य रूप से आधार कार्ड अपलोड करें। ऐसा न करने वाले शिक्षकों का वेतन भुगतान रोक दिया जाएगा।

यूपी बोर्डः परीक्षा कार्यक्रम घोषित, शिक्षकों के सामने कोर्स पूरा कराने की चुनौती

लखनऊ : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं 6 फरवरी से शुरू होंगी। बोर्ड के इतिहास में पहली बार है जब इतनी जल्दी परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। वहीं इस बार बोर्ड परीक्षा से पहले माध्यमिक स्कूलों को कक्षाएं संचालित करने के लिए महज सात महीने ही मिल रहे हैं, उसमें भी अवकाश और गृह परीक्षाओं को संचालित करना है।
ऐसे में पढ़ाई के लिए महज 96 दिन ही मिल पा रहे हैं। बोर्ड परीक्षा की तिथि की घोषणा होने के बाद जहां शिक्षकों के माथे पर कोर्स पूरा करने के लिए चिंता की लकीरें हैं, वहीं छात्रों के ऊपर भी पढ़ाई का दबाव बढ़ गया है। इस साल विधानसभा चुनाव के चलते यूपी बोर्ड का सत्र एक जुलाई से प्रारंभ हुआ।

जबकि हमेशा से सत्र एक अप्रैल से प्रारंभ होता था। वहीं शासन ने सीबीएसई के मुकाबले बोर्ड को खड़ा करने के लिए 6 फरवरी से बोर्ड परीक्षा कराने की घोषणा कर दी है। ऐसे में यूपी बोर्ड से संबद्ध माध्यमिक विद्यालयों के पास इस सत्र में कक्षाएं संचालित करने के साथ सभी परीक्षाओं को निपटाने के लिए केवल 210 दिन का ही समय है। यही नहीं इन्हीं महीनों में सभी गजेटेड अवकाश भी हैं।

सभी तरह के त्योहार और रविवार मिलाकर 84 दिन विद्यालय बंद रहते हैं। ऐसे में 210 दिन में से विद्यालयों के पास पढ़ाई के लिए महज 126 दिन ही बचते हैं। उनमें भी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं और प्री बोर्ड की परीक्षाएं भी करानी होती हैं। माध्यमिक विद्यालयों में अर्द्धवार्षिकपरीक्षाएं नवंबर और प्री बोर्ड की परीक्षाएं जनवरी में आयोजित होनी हैं।

शिक्षकों पर कोर्स पूरा कराने का दबाव

दोनों ही परीक्षाओं को संचालित करने में 15-15 दिन का समय लगता है। ऐसी स्थिति में विद्यालयों के पास इस सत्र में कक्षाएं संचालित करने के लिए महज 96 दिन ही मिल रहे हैं। इन 96 दिनों में हाईस्कूल और इंटर के छात्रों का पूरा कोर्स कवर करना है और रीविजन भी करवाना है। जबकि शासन ने माध्यमिक विद्यालयों के लिए 200 दिन की पढ़ाई और 20 दिन रीविजन के लिए निर्धारित किया है।

इस बार विद्यालय इस शैक्षिक कैलेंडर को पूरा नहीं कर रहे हैं। उन्हें कोर्स पूरा करने के लिए निर्धारित दिनों से काफी कम समय मिल रहा है। इससे शिक्षकों पर कोर्स पूरा करने के लिए अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। जबकि छात्रों को बोर्ड परीक्षा से पहले कोर्स को अच्छी तरह रिवाइज करने की चिंता सताने लगी है।

स्कूल फरवरी से पहले कोर्स पूरा कराने के लिए एक्स्ट्रा क्लासेस का सहारा ले रहे हैं। राजकीय विद्यालयों में उन्नति कार्यक्रम, रेमीडियल क्लासेस के जरिए कोर्स पूरा कराया जा रहा है। जहां पर विषयों में कमजोर छात्र पढ़ रहे हैं। यही नहीं यहां पर एक्स्ट्रा क्लासेस भी संचालित की जा रही हैं।

चलाई जा रही हैं एकस्ट्रा क्लासेस

​राजकीय कन्या इंटर कॉलेज सिंगार नगर और राजकीय इंटर कॉलेज शाहमीना रोड में छात्राओं के लिए एक्स्ट्रा क्लासेस संचालित की जा रही हैं। यहां के प्रधानाचार्यों ने बताया कि परीक्षा के समय में भी ये कक्षाएं संचालित रहेंगी ताकि कोर्स पूरा कराकर रीविजन कराया जा सके। राजकीय कॉलेजों में तो कई कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं, लेकिन कई सहायता प्राप्त विद्यालय कोर्स पूरा करने के नाम पर महज कोरम पूरा कर रहे हैं। छात्र कोचिंग और ट्यूशन का सहारा लेकर कोर्स पूरा करने में जुटे हैं।

अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 10 नवंबर से शुरू होंगी। जनवरी में प्री बोर्ड भी होगा। उससे पहले एक्स्ट्रा क्लासेस और रेमेडियल क्लासेस के माध्यम से कोर्स पूरा कराया जा रहा है। बोर्ड परीक्षा से पहले रीविजन भी करा दिया जाएगा।  - क्षमता रावत, प्रधानाचार्या, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, सिंगार नगर

हमारे यहां पर 3 नवंबर से अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। उन्नति और एक्स्ट्रा क्लास संचालित कर कोर्स पूरा किया जा रहा है। अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के दौरान भी एक्स्ट्रा क्लास संचालित करने का निर्णय लिया गया है। - शांति यादव, प्रधानाचार्या, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज शाहमीना रोड

इस बार जितने भी बदलाव किए जा रहे हैं वह अगले सत्र से लागू होने चाहिए थे। ताकि शिक्षकों के साथ छात्र भी तैयार रहें। बार-बार बदलाव करने से विद्यालय असमंजस की स्थिति में हैं। इससे छात्रों का नुकसान हो रहा है। - डॉ. आरपी मिश्र, प्रदेशीय मंत्री, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ


मदरसा शिक्षा को रोजगारपरक बनाएगी योगी सरकार

लखनऊ (राज्य ब्यूरो)। योगी आदित्यनाथ सरकार मदरसा शिक्षा को रोजगारपरक बनाने जा रही है। मदरसों में पढ़ाए जाने वाले आधुनिक विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव करने की तैयारी है। पाठ्यक्रम इस तरह से तैयार किया जा रहा है ताकि मदरसा शिक्षा को अधिक उपयोगी व रोजगारपरक बनाया जा सके।

पढ़ाने के लिए एनसीईआरटी की किताबों का सहारा लिया जाएगा। यूपी मदरसा बोर्ड की नवंबर व दिसंबर में होने वाली बोर्ड बैठक में पाठ्यक्रम में बदलाव के प्रस्तावित संशोधनों पर विचार किया जाएगा। इसमें पास होने के बाद आगामी सत्र 2018-19 से नए पाठ्यक्रम से मदरसों में पढ़ाई शुरू हो जाएगी। दरअसल, मदरसों में दो तरह की शिक्षा दी जाती है।

इनमें पहली धार्मिक शिक्षा व दूसरी आधुनिक विषयों जैसे गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, कंप्यूटर साइंस व सामाजिक विज्ञान की शिक्षा दी जाती है। सरकार ने साफ किया कि मदरसों में दी जा रही धार्मिक शिक्षा में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। ध्यान भी रखा जा रहा है कि मदरसों का मुख्य उद्देश्य धार्मिक शिक्षा प्रदान करने में कोई बदलाव न हो।

सरकार इस तरह से आधुनिक विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रही है ताकि धार्मिक शिक्षा में कोई असर न पड़े। प्रदेश सरकार मदरसा शिक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए अब तक कई बैठकें भी कर चुकी है। यह बैठक प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण मोनिका एस गर्ग व मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार राहुल गुप्ता के नेतृत्व में मदरसा प्रबंधकों, शिक्षकों, मुस्लिम समाज के विचारकों व एनसीईआरटी के प्रतिनिधियों के साथ हुई हैं।

एनसीईआरटी कि किताबों से पढ़ाई का फैसला ठीक मगर किताबों व शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चत हो अगले वर्ष जुलाई से शुरू होने वाले नए शैक्षिक सत्र से मान्यता प्राप्त मदरसों में एनसीईआरटी की उर्दू में छपी किताबों से शुरू होगी पढ़ाई-रजिस्ट्रार मदरसा शिक्षा परिषद

 विशेष संवाददाता-राज्य मुख्यालयप्रदेश सरकार ने अगले शैक्षिक सत्र से मान्यता प्राप्त मदरसों में एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई का फैसला तो किया है, लेकिन सरकार को मांग के मुताबिक पर्याप्त संख्या में किताबें उपलब्ध कराना चुनौती होगा। वहीं किताबों को पढ़ाने के लिए शिक्षक भी तैनात करने होंगे।आल इण्डिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिस-ए-अरबिया के महासचिव वहीदुल्लाह खान का कहना है कि राज्य के अरबी-फारसी मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करवाने का फैसला तो अच्छा है, मगर यह किताबें मांग के मुताबिक उपलब्ध होनी चाहिएं। साथ ही इन्हें पढ़ाने वाले शिक्षक भी पर्याप्त संख्या में तैनात किए जाने चाहिए। 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में उन्होंने कहा कि अरबी-फारसी मदरसों के शैक्षिक पाठयक्रम में कक्षा नौ व दस यानि आलिया दर्जे में इस वक्त सरकार ने सिर्फ चार शिक्षक ही दिए हैं जबकि इन मदरसों में गणित और अंग्रेजी की पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है। अब एनसीईआरटी की किताबें लागू होने के बाद विभिन्न विषयों की किताबें पढ़ाने के लिए शिक्षक भी तो होने चाहिएं।एक और सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इन मदरसों में धार्मिक शिक्षा भी दी जाती है, क्या एनसीईआरटी धार्मिक शिक्षा की ऐसी किताबें भी उपलब्ध करवाएगा? उन्होंने कहा कि मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने को किसी खास समुदाय या धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। दरअसल प्रदेश के यह मान्यता प्राप्त और अनुदानित मदरसे अरबी फारसी मदरसे कहलाते हैं और यह मदरसे अरबी-फारसी जैसी भाषाओं को समुचित संरक्षण देने के लिए संचालित किए जा रहे हैं, जैसे संस्कृत की पाठशालाएं और अन्य शिक्षण संस्थान। उधर, उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार राहुल गुप्ता का कहना है कि एनसीईआरटी के पास उर्दू में गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की किताबें हैं। यह किताबें अब प्रदेश के मान्यता प्राप्त मदरसों में अगले वर्ष जुलाई से शुरू होने वाले नए शैक्षिक सत्र से पढ़ाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि इस बाबत एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करा कर जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। फिलहाल मौजूदा शैक्षिक सत्र की परीक्षाएं आगामी मार्च-अप्रैल में करवाई जाएंगी। इनके परीक्षा फार्म इसी नवंबर में आनलाइन भरवाए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश शिक्षक भर्ती लिखित परीक्षा को हाईकोर्ट में चुनौती

इलाहाबाद (जेएनएन)। प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती की प्रस्तावित लिखित परीक्षा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी की है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि याचिका लंबित रहने का यह आशय नहीं होगा कि कोर्ट ने इस मामले में कोई अंतरिम आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने शिक्षामित्र अनिल कुमार वर्मा व दिनेश कुमार की याचिका पर दिया है। याची के अधिवक्ता ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि बीते 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को शिक्षामित्रों का समायोजन रद करने के बाद शिक्षामित्र के रूप में ही बनाए रखने का विवेकाधिकार दिया है। राज्य सरकार ने टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को भी लिखित परीक्षा कराकर सहायक अध्यापक नियुक्त करने का आदेश जारी किया है। कहा कि इस परीक्षा में शिक्षामित्रों के अलावा अन्य लोग भी बैठ सकेंगे। सरकार ने परीक्षा कराने का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना बताया है।

अधिवक्ता ने शिक्षामित्रों की दलील दी कि शिक्षकों की लिखित परीक्षा शीर्ष कोर्ट के आदेश के अनुपालन को शून्य करने वाली है। शिक्षामित्र विशेष वर्ग से आते हैं इसलिए उन पर भर्ती की शर्तें थोपी नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा करानी ही है तो उसमें गैर शिक्षामित्र को शामिल न किया जाए, बल्कि उनके ही वर्ग में कराई जाए। यह भी कहा गया कि शीर्ष कोर्ट के निर्णय में लिखित परीक्षा का कोई प्रावधान नहीं था, हालांकि शासन को चयन प्रक्रिया निर्धारित करने और सेवा नियमावली में संशोधन का पूरा अधिकार है।

कोर्ट में यह भी कहा गया कि शीर्ष कोर्ट ने विशेष तथ्य व परिस्थितियों को देखकर ही शिक्षामित्रों को आयु में छूट, भारांक व आगामी दो भर्तियों में अवसर देने को कहा है। साथ ही शिक्षामित्रों को मूल पद पर वापसी का मामला शासन के विवेक पर छोड़ दिया था। कहा गया कि शासन एक ओर शीर्ष कोर्ट का अनुपालन करने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर लिखित परीक्षा कराकर आदेश को व्यर्थ कर रहा है। कोर्ट ने अभी इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय नहीं की है। 

मूल्यांकन के लिए विद्यालयों में स्थापित होगा 'शाला सिद्धि'

अब राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का मूल्यांकन 'शाला सिद्धि' नाम का पोर्टल करेगा। यह पोर्टल समस्त विद्यालयों में अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। संबंधित क्लर्क और कंप्यूटर आपरेटरों को विद्यालयों की एक-एक सूचनाएं भरनी होंगी। इस पोर्टल के जरिये विद्यालयों की आनलाइन रिपोर्ट विभाग और शासन को मिलती रहेगी। पोर्टल को संचालित करने के लिए सोमवार को एमएसआइ इंटर कालेज में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने प्रोजेक्टर के माध्यम से पोर्टल में भरी जाने वाली सूचनाओं की विस्तृत जानकारी दी। राजकीय हाईस्कूल गोपालपुर के प्रधानाचार्य व प्रशिक्षण के नोडल अधिकारी वीके सिंह ने पोर्टल की एक-एक बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। क्लर्को और आपरेटरों को मैनुअल पुस्तिका की एक-एक प्रति भी प्रदान की गई।

जूनियर कक्षाओं के गणित प्रश्नपत्र में भी गड़बड़ी

गोंडा : पूर्व माध्यमिक कक्षाओं में पढ़ रहे छात्रों के गणित प्रश्नपत्र में भी खामियां हैं। तीन के स्थान पांच तो कहीं पांच के जगह तीन लिख दिया गया है। इससे छात्रों को परेशानी हुई। कई स्कूलों में ब्लैकबोर्ड पर लिखकर प्रश्नपत्र हल कराया। बीईओ स्कूलों का निरीक्षक करना मुनासिब नहीं समझ रहे। इससे परीक्षा में मनमानी का खेल चल रहा है। अ‌र्द्धवार्षिक परीक्षा को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की थी। परीक्षा के लिए बनाए गए प्रश्नपत्र के परीक्षण में भी दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। इससे जूनियर स्कूलों में गणित के प्रश्नपत्र में खामी है। कक्षा आठ के प्रश्न दो में चार प्रश्न पूछे गए और करना पांच है। कक्षा सात के खंड ग में तीन प्रश्न हैं, लेकिन छात्रों को पांच प्रश्न करने के निर्देश दिए गए हैं। कई स्कूलों में प्रश्नपत्र नहीं पहुंच सके। खंड शिक्षा अधिकारियों ने स्कूलों का नहीं किया। बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार देव पांडेय ने बताया कि सभी स्कूलों में प्रश्नपत्र पहुंचाए जा चुके हैं। प्रश्नपत्र की श्रुटि को सुधार कर शिक्षक परीक्षा करा रहे हैं।

राष्ट्रीय प्रतिभा खोज (NTSC) परीक्षा में अब ओबीसी को भी आरक्षण

नई दिल्ली : राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा (एनटीएसई) में सरकार अब अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी आरक्षण देगी। मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने केंद्र के तय आरक्षण नियमों के तहत एनटीएसई के दूसरे चरण में ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने को मंजूरी दे दी है।
फिलहाल ओबीसी वर्ग को इसका लाभ 2019 से मिलेगा, एनटीएसई 2018 की प्रक्रिया चालू हो चुकी है। इस परीक्षा के जरिये 11वीं, 12वीं, स्नातक और परास्नातक के प्रतिभाशाली छात्रों का चयन छात्रवृत्ति के लिए किया जाता है।
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंगलवार को एक ट्वीट के जरिये यह जानकारी दी। अभी तक इस परीक्षा में सिर्फ एससी, एसटी और विकलांग वर्ग को ही आरक्षण दिया जाता था। इसके साथ ही मंत्रलय ने एनटीएसई के दूसरे चरण में दी जाने वाली छात्रवृत्ति के लिए चुने जाने वाले छात्रों की संख्या को भी दोगुना कर दिया है। यानि अब यह हर साल दो हजार छात्रों को मिलेगी। अभी तक सिर्फ एक हजार छात्रों को ही प्रतिवर्ष छात्रवृत्ति का लाभ मिलता है।

शिक्षकों के तबादलों पर लगाई गई रोक, अपर शिक्षा निदेशक ने निर्देश किए जारी

इलाहाबाद : प्रदेश के अशासकीय माध्यमिक सहायता प्राप्त कालेजों में बड़े पैमाने पर गुपचुप तबादले हुए हैं। नगर निकाय की आचार संहिता लागू होने के बाद भी यह खेल पिछली तारीखों में चला। इसकी भनक लगने पर शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने कड़ा एतराज जताया है।

अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक व मंडलों में तैनात संयुक्त शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिया है कि मध्य सत्र में किसी के तबादले न किए जाएं, यदि तबादला अपरिहार्य है तो उसकी शासन से अनुमति लेना जरूरी होगा। राजकीय हाईस्कूल व इंटरमीडिएट कालेजों में शिक्षकों के समायोजन और तबादले की प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेश पर जहां की तहां रुक गई थी, लेकिन अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक कालेजों में तबादलों की प्रक्रिया अलग होने का लाभ शिक्षकों ने बड़े पैमाने पर उठाया है। असल में अशासकीय कालेजों में इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम (यथा संशोधित) 1921 के अध्याय तीन के विनिमय 55 व विनिमय 61 में दिए गए प्रावधानों के तहत होते हैं।

इसमें शिक्षकों का एकल स्थानांतरण अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक व संयुक्त शिक्षा निदेशक स्तर पर गठित समिति की सहमति के आधार पर कार्रवाई की जाती है। इसमें मुख्य रूप से यह देखा जाता है कि शिक्षक जिस स्कूल से स्थानांतरित हो रहा है और जिस कालेज में स्थानांतरण हो रहा है, दोनों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य की सहमति व संबंधित पद की रिक्ति जरूरी है। इसी आधार पर पिछले दिनों में तमाम स्थानांतरण किए गए हैं। यही नहीं नगर निकाय की अधिसूचना जारी होने के बाद पिछली तारीखों में यह खेल चलता रहा है। शिक्षा निदेशक माध्यमिक डॉ. अवध नरेश शर्मा ने निर्देश दिया है कि माध्यमिक कालेजों में अब प्रायोगिक परीक्षा का कार्यक्रम घोषित होने जा रहा है। वहीं, तबादलों से यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के लिए छात्र-छात्रओं का पठन-पाठन भी बाधित होगा। इसलिए अशासकीय कालेजों के तबादले छात्रहित में रोके जाते हैं। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि मध्य शैक्षिक सत्र में प्रधानाचार्य व शिक्षकों के स्थानांतरण आदेश जारी न किए जाएं।

हर छात्र को छात्रवृत्त‌ि देने के लिए योगी सरकार की नई योजना

लखनऊ: प्रदेश में अगले साल से हर छात्र को वजीफा मिलेगा। इसके लिए छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति योजना को अलग-अलग करने का निर्णय लिया गया है। योगी सरकार के इस फैसले से 50 लाख से ज्यादा विद्यार्थी लाभान्वित होंगे।
राज्य सरकार दो लाख रुपये तक सालाना आमदनी वाले परिवारों के बच्चों को छात्रवृत्ति के साथ-साथ शुल्क की भरपाई की सुविधा देती है।

छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत यह लाभ दिया जाता है। वर्ष 2016-17 में योजना के लिए 50.85 लाख छात्र पात्र पाए गए थे। इनके लिए कुल 5216.04 करोड़ रुपये के बजट की जरूरत थी।

संबंधित विभागों के पास इस मद में 3435 करोड़ रुपये ही उपलब्ध था। नतीजतन, 20 लाख छात्र योजना का लाभ पाने से वंचित रह गए।

अभी छात्रवृत्ति के साथ ही शुल्क की भरपाई की जाती है। यानी, जिन छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाती है, उन्हें ही शुल्क भरपाई का लाभ मिल पाता है। अब शासन ने फैसला किया है कि अगले सत्र से छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई की वरीयता सूची अलग-अलग बनाई जाएगी। पहले सभी छात्रों को वजीफा दे दिया जाएगा। उसके बाद शुल्क भरपाई की वरीयता सूची पर विचार होगा।

बता दें, कक्षा-10 से ऊपर के विभिन्न कक्षाओं के छात्रों को 4 हजार रुपये से लेकर 12 हजार रुपये तक छात्रवृत्ति दी जाती है। इस निर्णय से प्रत्येक छात्र योजना के तहत 4 हजार से 12 हजार रुपये तक पा जाएगा।

नियोजित शिक्षक मामलाः समान काम के लिए मिले समान वेतन- पटना हाइकोर्ट

पटना : राज्य के करीब चार लाख नियोजित शिक्षकों के लिए खुशखबरी है। हाईकोर्ट ने समान काम के बदले समान वेतन देने का आदेश देते हुए राज्य सरकार से कहा है कि नियोजित शिक्षकों को 8 दिसंबर 2009 से स्थायी शिक्षक के समान वेतन दिया जाए। साथ ही सभी नियोजित शिक्षकों को 7वां वेतन देने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन माह के भीतर सारी प्रक्रिया पूरी कर नियोजित शिक्षकों को 'इक्वल वेज फॉर इक्वल वर्क' देने को कहा है। यह भी कहा है कि राजकीयकृत स्कूल रेगुलर शिक्षकों के समान नियोजित शिक्षकों का वेतन फिक्स करें।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन तथा न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने 11 मामले पर 92 पन्ने का अपना फैसला सुनाया। नियोजित शिक्षक आवेदकों की ओर से वरीय अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद सिंह, पीके शाही, दीनू कुमार, राजीव कुमार सिंह, सत्यम् शिवम् सुंदरम् तथा अरविंद कुमार शर्मा ने बहस में भाग लिया। वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर सहित विनयकृति सिंह तथा शिल्पा सिंह ने रखा।

नियमावली को दी थी चुनौती : आवेदकों की ओर से नियोजित शिक्षकों के लिए बनी नियमावली के नियम 6 एवं 8 की वैधता को चुनौती दी गई थी। उनके वकीलों ने नियम को गैर संवैधानिक बताते हुए कहा कि एक ही स्कूल में एक प्रकार के काम के लिए स्थायी शिक्षकों को अलग वेतन और नियोजित शिक्षकों को अलग वेतन दिया जा रहा है। जबकि स्थायी शिक्षक से कहीं ज्यादा काम नियोजित शिक्षक कर रहे हैं।

एक माह के बाद भी पीसीएस 2017 की उत्तरकुंजी जारी नहीं धीमी गति के कारण फरवरी में ही हो सकेगी पीसीएस की मुख्य परीक्षा, रुके हुए परिणाम को जारी करने में तेजी

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : सपा शासन में हुए इम्तिहान के रुके परिणाम जारी करने में तेजी दिखा रहा उप्र लोक सेवा आयोग वर्तमान में हुई परीक्षा पीसीएस (प्रारंभिक) 2017 में पिछड़ रहा है। प्रारंभिक परीक्षा के सवा महीने बाद भी उत्तरकुंजी आयोग जारी नहीं कर सका है। ऐसे में मुख्य परीक्षा अगले वर्ष 2018 के फरवरी महीने से पहले होना संभव नहीं है। इस लेटलतीफी को लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं में नाराजगी बढ़ रही है।
यूपी पीएससी ने सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (प्रारंभिक) 2017 विगत 24 सितंबर को प्रदेश के 21 जिलों में 982 केंद्रों पर कराई थी। इसमें दो लाख 46 हजार 710 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इस परीक्षा को हुए एक महीने और एक सप्ताह हो चुके हैं। अभी तक आयोग इसकी उत्तर कुंजी जारी नहीं कर सका है। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होने की चर्चा है। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि उत्तर कुंजी जारी होने के बाद आपत्तियां ली जाने और फिर संशोधित उत्तर कुंजी जारी होने में कम से कम एक महीने लगेंगे। इसके दो महीने यानी कम से कम 60 दिन बाद मुख्य परीक्षा होगी। यह स्थिति तब होगी जब आज के ही दिन आयोग उत्तरमाला को जारी कर दी। फिलहाल इसके कोई आसार प्रतियोगियों को नहीं दिख रहे हैं। तमाम प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि यही स्थिति रही तो आयोग पीसीएस की मुख्य परीक्षा फरवरी महीने में ही करा पाएगा।एपीओ 2015 के न्यूनतम कटआफ आज होंगे जारी1सहायक अभियोजन अधिकारी परीक्षा यानी एपीओ 2015 से संबंधित सभी अभ्यर्थियों के लिखित और अंतिम परिणाम का श्रेणीवार न्यूनतम कट आफ अंक, उप्र लोकसेवा आयोग वेबसाइट पर जारी कर रहा है। कट आफ अंक वेबसाइट द्ग222.ह्वश्चश्चह्यष्.
ह्वश्च.ठ्ठद्बष्.द्बठ्ठ पर एक से सात नवंबर 2017 तक उपलब्ध रहेंगे। यह जानकारी देते हुए आयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार ने कहा है कि अभ्यर्थी अपने अनुक्रमांक और जन्म की तारीख के आधार पर प्राप्तांक देख सकते हैं और प्राप्त कर सकते हैं। कहा है कि प्राप्तांकों के संबंध में सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के तहत कोई भी प्रार्थना पत्र न दिए जाएं।

प्रोन्नति में कोटा रद करने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

जागरण ब्यूरो
माला दीक्षित ’ नई दिल्ली
केंद्रीय कर्मियों को प्रोन्नति में आरक्षण देने का प्रावधान रद करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई है। केंद्रीय सचिवालय अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में मामले की मेरिट पर सुनवाई होने तक हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की गई है। सुप्रीम कोर्ट याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा।मालूम हो कि दिल्ली हाई कोर्ट ने गत 23 अगस्त को केंद्र सरकार के कार्मिक एवं पेंशन विभाग (डीओपीटी) का 13 अगस्त, 1997 का आदेश (ऑफिस मेमोरेंडम) रद कर दिया था। इस मेमोरेंडम के जरिये एससी/एसटी वर्ग के केंद्रीय कर्मियों को प्रोन्नति में आरक्षण का प्रावधान था। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद से केंद्रीय नौकरियों में प्रोन्नति में आरक्षण खत्म हो गया है। हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश रद करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों के एम. नागराज के फैसले को आधार बनाया है। इसमें कहा गया है कि प्रोन्नति में आरक्षण देने से पहले पिछड़ेपन और अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के आंकड़े जुटाने होंगे। संघ ने सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट का आदेश रद करने की मांग की है। इंद्रा साहनी के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रोन्नति में आरक्षण की मनाही की थी। हालांकि, कहा था कि यह 16 नवंबर, 1992 से पांच साल के लिए जारी रखा जा सकता है। यानी प्रोन्नति में आरक्षण सिर्फ 15 नवंबर, 1997 तक जारी रह सकता था। इंद्रा साहनी के फैसले के बाद सरकार ने 1995 में संविधान में 77वां संशोधन कर अनुच्छेद 16 में प्रावधान (4ए) जोड़ा और एससी/एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण की आगे की राह खोली।माला दीक्षित ’ नई दिल्ली  केंद्रीय कर्मियों को प्रोन्नति में आरक्षण देने का प्रावधान रद करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई है। केंद्रीय सचिवालय अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में मामले की मेरिट पर सुनवाई होने तक हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की गई है। सुप्रीम कोर्ट याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। मालूम हो कि दिल्ली हाई कोर्ट ने गत 23 अगस्त को केंद्र सरकार के कार्मिक एवं पेंशन विभाग (डीओपीटी) का 13 अगस्त, 1997 का आदेश (ऑफिस मेमोरेंडम) रद कर दिया था। इस मेमोरेंडम के जरिये एससी/एसटी वर्ग के केंद्रीय कर्मियों को प्रोन्नति में आरक्षण का प्रावधान था। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद से केंद्रीय नौकरियों में प्रोन्नति में आरक्षण खत्म हो गया है। हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश रद करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों के एम. नागराज के फैसले को आधार बनाया है। इसमें कहा गया है कि प्रोन्नति में आरक्षण देने से पहले पिछड़ेपन और अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के आंकड़े जुटाने होंगे। संघ ने सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट का आदेश रद करने की मांग की है। इंद्रा साहनी के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रोन्नति में आरक्षण की मनाही की थी। हालांकि, कहा था कि यह 16 नवंबर, 1992 से पांच साल के लिए जारी रखा जा सकता है। यानी प्रोन्नति में आरक्षण सिर्फ 15 नवंबर, 1997 तक जारी रह सकता था। इंद्रा साहनी के फैसले के बाद सरकार ने 1995 में संविधान में 77वां संशोधन कर अनुच्छेद 16 में प्रावधान (4ए) जोड़ा और एससी/एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण की आगे की राह खोली।

कामकाज के लिए -वेतन विसंगति दूर करने की मांग -राजकीय शिक्षक संघ ने 18 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा

हिन्दुस्तान टीम, लखनऊUpdated: 31 अक्तूबर, 2017 8:55 PM
राज्य मुख्यालय। राजकीय शिक्षक संघ ने मंगलवार को वेतन समिति की अध्यक्ष वृंदा स्वरूप से मुलाकात कर अपना 18 सूत्री मांगपत्र सौंपा।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष पारसनाथ पाण्डेय ने बताया कि एसीपी का लाभ, छठे छठे वेतनमान से चयन प्रोन्नति वेतनमान पर वेतन वृद्धि, पदोन्नति पर वेतन वृद्धि, वेतनमान में बंचिग की सुविधा, एलटी प्रोन्नत वेतनमान पे मैट्रिक्स की उससे ऊपर की श्रेणी में वेतन निर्धारित करने पर सहमति बन गई है।

उन्होंने बताया कि इंटर कॉलेज के शिक्षक सरकारी कर्मचारी है इसलिए उन्हें स्तरोन्नयन वेतनमान दिया जाना चाहिए। वहीं शिक्षकों के वेतन निर्धारण में छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुसार बंचिंग सुविधा का लाभ प्रदान किया जाना चाहिए। 1 जनवरी से 30 जून तक नियुक्त/प्रोन्नत को जनवरी और 1 जुलाई से 31 दिसम्बर तक नियुक्त/प्रोन्नत को माह जनवरी में वेतनवृद्धि चुनने का विकल्प दिया जाए। इसके अलावा पदोन्नति पर एक वेतनवृद्धि का लाभ, एलटी, प्रवक्ता, प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के वेतनमान क्रमश: 4800/,5400/6600/ 7600/ग्रेड वेतन में उच्चीकृत किया जाय। एसडीआई संवर्ग(खण्ड षिक्षाधिकारी) का पद वेसिक शिक्षा का है इसलिए इन पदों को वेसिक शिक्षा विभाग तक ही सीमित रखा जाए। अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों को पुरानी पेंशन, सेवानिवृत्ति की आयु ग्रेच्युटी मिला कर 65 वर्ष की जाए।

शिक्षा मित्रों को मूल विद्यालय जाने का इंतजार, कई जिलों के बीएसए ने बेसिक शिक्षा परिषद के अफसरों से मांगा दिशा-निर्देश

ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 01 Nov 2017 01:34 AM IST
कई जिलों के बीएसए ने बेसिक शिक्षा परिषद के अफसरों से मांगा दिशा-निर्देश
 कुछ बीएसए ने शिक्षामित्रों को मूल पद एवं विद्यालय में वापस करने का दिया निर्देश
सहायक अध्यापक पद से समायोजन निरस्त होने और प्रदेश सरकार की ओर से प्रतिमाह 10 हजार रुपये मानदेय पर निर्णय होने के बाद अब शिक्षामित्रों को अपने मूल विद्यालयों में जाने का इंतजार है। कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) ने बेसिक शिक्षा परिषद के अफसरों को पत्र लिखकर इस संबंध में दिशा-निर्देश मांगा लेकिन शासन से मानदेय के अलावा कोई आदेश न होने के कारण परिषद के अफसर भी कुछ बोलने से बच रहे हैं। हालांकि इन सबके बीच कुछ जिलों में बीएसए शिक्षामित्रों को उनके मूल पदों एवं विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दे रहे हैं।
सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन होने के बाद शिक्षामित्रों को दूसरे जिलों, ब्लाकों में तैनाती दी गई थी। वेतन तकरीबन 38 हजार रुपये होने के कारण उस दौरान शिक्षा मित्रों ने तत्काल दूसरे जिलों, ब्लाकों में तैनाती ले ली लेकिन अब वे उन विद्यालयों के बजाए सहायक अध्यापक बनने के पहले जिन विद्यालयों में तैनात थे, वहीं भेजने की मांग कर रहे हैं लेकिन इस पर सरकार ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। शिक्षामित्रों का कहना है कि 10 हजार रुपये मानदेय पर वे दूसरे जिलों या ब्लाकों में काम करने में असमर्थ हैं। इसकी वजह से काफी विद्यालयों में शिक्षामित्र नियमित रूप से जा भी नहीं रहे हैं। इसकी असर पठन-पाठन पर पड़ रहा है।
बेसिक शिक्षा निदेशालय से किसी तरह का दिशा-निर्देश न मिलने और शिक्षामित्रों के विद्यालयों में नियमित न आने से प्रभावित हो रही पढ़ाई को देखते हुए कई जिलों के बीएसए अपने स्तर से शिक्षामित्रों को उनके मूल विद्यालयों में भेजने का निर्देश कर रहे हैं। प्रतापगढ़ के बीएसए ने समायोजित शिक्षकों को उनके मूल पद (शिक्षामित्र) पर वापस किए जाने के आदेश के क्रम में मंगलवार को उन्हें तत्काल प्रभाव से मूल पद एवं विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश जारी कर दिया, जबकि इलाहाबाद समेत कई जिलों में बीएसए अभी सरकार और निदेशालय से आदेश का इंतजार कर रहे हैं।

800 बच्चों को सोलर लैंप

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माध्यमिक शिक्षा: सेवानिवृत्त अध्यापकों जिनकी आयु 70 वर्ष पूरी न हुई हो, को मानदेय पर शिक्षण कार्य लिए जाने के सम्बन्ध में


यूपी में 4 लाख कर्मचारियों, अधिकारियों की स्क्रीनिंग पर आज लगेगी अंतिम मोहर


Updated on: October 31, 2017, 1:49 PM IST
news18 hindi , ETV UP/Uttarakhand
यूपी में 4 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों की स्क्रीनिंग पर मंगलवार को अंतिम मोहर लगेगी. आज सभी विभागों के प्रमुख सचिव और विभागों के प्रमुखों से उनके विभागों के दागी अफसरों की सूची तलब की है.

बता दें, कि अभी तक प्रदेश के दर्जन भर प्रमुख विभागों ने दगियों की सूची नहीं दी है. लोक निर्माण, परिवहन,पंचायती राज पुलिस के अलावा 60 विभागों की पूरी सूची अभी तक नहीं मिली है. मुख्य सचिव राजीव कुमार को आज देर रात तक सभी 5 दर्जन से अधिक विभागों को सूची देनी है.

लेकिन मुख्य सचिव के निर्देश के बाद भी एक माह में कई नोटिस के बाद भी कई विभागों ने दागियों की लिस्ट नहीं दी थी. लेकिन जिन विभागों की सूची नहीं आएगी उन पर भी कार्रवाई होना तय माना जा रहा हैं.

सरकार के प्रवक्ता और मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने साफ़ कहा है कि काम न करने वाले 50 साल के ऊपर के भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों पर कार्रवाई तय है. जो बच नहीं सकते वहीं पिछली सरकारों ने15 सालो से बचाया था पर अब कार्रवाई से कोई नहीं रोक सकता.
https://hindi.news18.com/amp//news/uttar-pradesh/lucknow-officer-and-employee-screening-last-date-to-submit-report-1152473.html

निर्वाचन के दौरान SMS तथा Social Media पर निगरानी रखने के सम्बन्ध में राज्य निर्वाचन आयोग ने अधिसूचना किया जारी


​शिक्षामित्रों के लिए मूल विद्यालय में वापसी का प्रतापगढ़ BSA के द्वारा आदेश जारी, देखने के लिए यहाँ क्लिक करें​


पीडब्लूडी के 550 अफसरों पर गिरी गाज, भ्रष्टाचार पर योगी सरकार की अबतक की सबसे बड़ी कार्यवाही


स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार 2017-18 में पंजीकरण को अंतिम तिथि 31 अक्टूबर, 2017 से बढ़ाकर 15 नवंबर 2017 तक की गई


भर्तियों की सीबीआइ जांच ठंडे बस्ते में, सपा शासन में हुई सभी भर्तियों की सीबीआइ जांच का आदेश हुए साढ़े तीन महीने हो चुके हैं लेकिन, इस साल के अंत तक जांच शुरू होने की संभावना कम

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : सपा शासन में हुई सभी भर्तियों की सीबीआइ जांच का आदेश हुए साढ़े तीन महीने हो चुके हैं लेकिन, इस साल के अंत तक जांच शुरू होने की संभावना कम ही है। उप्र लोक सेवा आयोग में अभी इस संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं पहुंचा है। उधर प्रदेश में निकाय चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, इस वजह से भी जांच फिलहाल शुरू होने की संभावना कम ही नजर आ रही है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 जुलाई को कैबिनेट की बैठक के दौरान सपा शासन के पांच साल में हुई सभी भर्तियों की सीबीआइ जांच कराने का एलान किया था। इससे प्रदेश में खलबली मच गई थी। तमाम परीक्षा संस्थाओं के अलावा उप्र लोक सेवा आयोग सबसे अधिक निशाने पर था क्योंकि यहीं से सबसे अधिक भर्तियां हुई थीं। भर्तियों में धांधली के आरोप तत्कालीन अध्यक्ष पर भी लगे थे जिन्हें आयोग से हटा भी दिया गया। इस बीच सपा शासन में कराई गई तमाम परीक्षाओं के परिणाम भी उप्र लोक सेवा आयोग ने जारी किए हैं, जबकि इन साढ़े तीन महीनों में सीबीआइ जांच से संबंधित कोई भी आदेश आयोग में नहीं पहुंचा। हालांकि आयोग का यह भी कहना है कि जांच होगी तो तथ्य पेश किए जाएंगे। सचिव जगदीश ने बताया कि अभी सीबीआइ जांच के आसार नहीं दिख रहे हैं, हालांकि जांच होनी तय है।
उधर उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अधिकांश अधिकारियों और कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी भी निर्धारित होने लगी है। ऐसे में इस साल के अंत तक जांच की संभावना कम ही नजर आ रही है।

छोटे सवालों से मिलेगा बड़ा जवाब ,बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों की शिक्षक भर्ती का मामला

राब्यू, इलाहाबाद : बच्चों को अक्षर ज्ञान कराने का जिम्मा उन्हीं अभ्यर्थियों को मिलेगा, जो विभागीय कसौटी पर खरे उतरेंगे। शैक्षिक मेरिट की जगह शिक्षा अर्जित करते समय मिली मेधा ही अब काम आएगी। इसीलिए परिषदीय शिक्षक बनने के लिए अभ्यर्थियों को अब दो-दो परीक्षाएं उत्तीर्ण करनी हैं। पहली परीक्षा अर्हता है तो दूसरी में मिले अच्छे अंक ही यह रास्ता आसान करेंगे। शिक्षकों की गुणवत्ता बेहतर करने को लिखित परीक्षा का ऐसा खाका खींचा गया है, जिसमें टीईटी से भी कठिन सवाल होंगे। छोटे सवालों के उत्तर से ही बड़ा जवाब मिलने की उम्मीद है।
बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती मेरिट के आधार पर होती रही है, पहली बार लिखित परीक्षा का आयोजन होना है। असल में प्रदेश सरकार लगातार शैक्षिक गुणवत्ता की बेहतरी पर जोर दे रही है, लेकिन पठन-पाठन का स्तर विद्यालयों में सुधर नहीं रहा है। डीएलएड यानी पूर्व बीटीसी कालेजों में पढ़ाई का स्तर का किसी से छिपा नहीं है, इसीलिए अभ्यर्थी टीईटी तक उत्तीर्ण नहीं कर पा रहे हैं। इसको ध्यान में रखकर तय हुआ कि उन्हीं अभ्यर्थियों को शिक्षक बनने का मौका दिया जाए, जो मेधावी हों। शीर्ष कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि टीईटी सिर्फ अर्हता परीक्षा है उसके आधार पर चयन नहीं होगा। ऐसे में 68500 शिक्षकों की भर्ती परीक्षा दिसंबर माह में कराने की तैयारी है। यह परीक्षा माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को देने की तैयारी है।
बेसिक शिक्षा निदेशालय ने शिक्षक भर्ती का सिलेबस तैयार करने को सभी डायटों से सुझाव मांगे हैं। तीन घंटे होने वाली परीक्षा 150 अंकों की होगी। इसमें अति लघु उत्तरीय ही प्रश्न पूछे जाएंगे। किस विषय के कितने सवाल होंगे यह भी तय हो चुका है। परीक्षा के सिलेबस में डीएलएड का पाठ्यक्रम मूल में रखा गया है साथ ही अन्य प्रश्न इंटरमीडिएट स्तर के होंगे। इसमें तार्किक ज्ञान, सामान्य ज्ञान, विज्ञान, गणित, अंग्रेजी के अलावा पर्यावरण व आइटी के प्रश्न अभ्यर्थियों को छकाएंगे। निबंध के अलावा हर प्रश्न का जवाब लिखकर लेने का कारण अभ्यर्थियों के लेखन का सूक्ष्म परीक्षण करना है।

शिक्षकों के चयन के लिए हर जिले में बनेगा पूल, प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक कालेजों में सेवानिवृत्त शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आदेश जारी

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक कालेजों में सेवानिवृत्त शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आदेश जारी हो गया है। अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल ने यह आदेश नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना के पहले ही जारी कर दिया है, अब यह जिलों में पहुंच रहा है। इसमें संविदा पर नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के चयन के लिए हर जिले में एक पूल बनाया जाएगा। साथ ही हर साल एक से 20 अप्रैल तक उन सेवानिवृत्त शिक्षकों से आवेदन लिए जाएंगे, जिनकी संबंधित शैक्षिक सत्र पूरा होने तक आयु 70 वर्ष पूरी न होती हो।उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से चयनित अभ्यर्थी के आने या एक जुलाई से 20 मई तक की समाप्ति में जो पहले घटित हो रहा हो तक के लिए अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक कालेजों में सहायक अध्यापक व प्रवक्ता के पद पर सेवानिवृत्त सहायक अध्यापक व प्रवक्ता की नियुक्ति होगी। इसमें शर्त यह है कि मानदेय पर नियुक्ति पाने वाला शैक्षिक सत्र एक जुलाई से मई में ग्रीष्मावकाश घोषित होने तक की अवधि में 70 वर्ष की आयु पूरी न कर रहा हो। अपर मुख्य सचिव ने यह नियुक्तियां अल्पकालिक व्यवस्था के तहत छात्र-छात्रओं के हित में करने को कहा है, क्योंकि प्रदेश के तमाम कालेजों में सहायक अध्यापक व प्रवक्ताओं के आकस्मिक निधन, सेवाच्युत होने या फिर सेवानिवृत्त होने से पद रिक्त चल रहे हैं। ज्ञात हो कि सरकार ने माध्यमिक कालेजों में 26 हजार सेवानिवृत्त शिक्षकों को मानदेय पर नियुक्त करने का आदेश दिया था। प्रवक्ता को 20 हजार व सहायक अध्यापक को 15 हजार रुपये मानदेय प्रतिमाह मिलेगा। अपर मुख्य सचिव ने इन नियुक्तियों के लिए हर जिले में जिला विद्यालय निरीक्षक को पूल गठित करने का निर्देश दिया है। जिसमें हर साल एक से 20 अप्रैल तक उन सेवानिवृत्त शिक्षकों से आवेदन लिए जाएंगे जो सेवा शर्ते पूरी करते हैं।

सहायक अध्यापक बनने में मददगार होगा ग्रामर और जीएस,

हिन्दुस्तान टीम, इलाहाबादUpdated: 30 अक्तूबर, 2017 1:14 PM
बे सिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद पर होने वाली भर्ती की लिखित परीक्षा का पाठ्यक्रम जारी कर दिया है। शिक्षकों की इस भर्ती में 150 नंबर के कुल 150 अति लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे। यह प्रश्न कुल दस विषयों के होंगे।

उत्तर देने के लिए परीक्षार्थियों को तीन घंटे का वक्त मिलेगा। सबसे ज्यादा 40 प्रश्न भाषा (हिन्दी तथा अंग्रेजी) के होंगे। इसमें व्याकरण यानी ग्रामर और अपठित गद्यांश, पद्यांश यानि कांप्रिहेंशन्स के प्रश्न पूछे जाएंगे। तीस प्रश्न सामान्य ज्ञान/समसामयिक घटनाओं (जीएस) से जुड़े होंगे। इसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रदेश से संबंधित महत्वपूर्ण घटनाओं, स्थान, व्यतित्व, रचनाएं, अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार, खेल-कूद, भारतीय संस्कृति एवं कला के प्रश्न होंगे।

स्पष्ट है कि शिक्षक भर्ती में व्याकरण और जीएस की महत्वपूर्ण भूमिका होगी क्योंकि 150 में से 70 नंबर के प्रश्न इन्हीं दोनों विषयों से होंगे। अभ्यर्थियों को यह परीक्षा पास करने के लिए इन दोनों खंडों पर महत्वपूर्ण पकड़ बनानी होगी। गणित के 20 नंबर के प्रश्न होंगे।

दिसंबर में होनी है 68500 पदों पर भर्ती

प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों के 68500 पदों पर भर्ती होनी है। तीस नवंबर को टीईटी 2017 का परिणाम घोषित किया जाना है। इसके बाद दिसंबर के दूसरे पखवाड़े से शिक्षकों के इन रिक्त पदों पर भर्ती शुरू हो सकती है। इसमें टीईटी में सफल अभ्यर्थी शामिल होंगे। अभी तक एकेडमिक मेरिट पर भर्ती होती थी।

सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को भारी पड़ी गलत बयानी, हाईकोर्ट में गलत बयानी करना महंगा पड़ गया

ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Mon, 30 Oct 2017 08:54 PM IST
पेंशन विवाद: हाईकोर्ट में गलत सूचना देने पर तलब किए गए
सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को हाईकोर्ट में गलत बयानी करना महंगा पड़ गया। मांगी गई जानकारी देने के बजाय दूसरी सूचना देने पर हाईकोर्ट ने उनको तलब कर लिया है। मामला बेसिक शिक्षा विभाग में पेंशन विवाद का है। अप्रशिक्षित अध्यापकों की पेंशन के विवाद को लेकर हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हैं। कोर्ट ने विभाग से इन याचिकाओं की जानकारी मांगी थी। इसके बजाए सचिव ने विभाग में दाखिल अर्जियों की संख्या कोर्ट में बता दी। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा सचिव को हलफनामे के साथ याचिकाओं की संख्या बताने और अगली सुनवाई पर हाजिर रहने का निर्देश दिया है।
वाराणसी के महेश प्रसाद और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने यह आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई छह नवंबर को होगी। याची के अधिवक्ता का कहना था कि याचीगण पुरानी पेंशन पाने के हकदार हैं, क्योंकि उनका जीपीएफ 2009 तक काटा गया है। जबकि सरकार का कहना है कि मृतक आश्रित कोटे के तहत अप्रशिक्षित अध्यापकों को स्थायी नियुक्ति देने का निर्णय 15 नवंबर 2011 मेें लिया गया। जो लोग एक अप्रैल 2005 से काम कर रहे हैं, उनको नई पेंशन मिलेगी वह पुरानी पेंशन पाने के हकदार नहीं हैं। इसी एक प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट में सैकड़ों याचिकाएं लंबित हैं।
कोर्ट का मत था कि एक ही विषय होने के कारण सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी चाहिए। इसलिए सभी लंबित याचिकाओं की सूची मांगी गई। इसके जवाब में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि विभाग में मृतक आश्रित कोटे के तहत 1020 अर्जियां अभी लंबित हैं। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि परिषद मांगी गई सूचना देने के बजाए दूसरी सूचना दे रहा है। इसके लिए उस पर हर्जाना लगाया जाना चाहिए। इस स्पष्टीकरण के साथ अगली सुनवाई पर सचिव को तलब किया है।

परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था सुधारेंगे अफसर, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद से लेकर संयुक्त उप शिक्षा निदेशक तक की तय की गई जिम्मेदारी एससीईआरटी के निदेशक ने जारी किया आदेश, अफसर हर माह करेंगे दो जिलों का निरीक्षण

ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Mon, 30 Oct 2017 08:54 PM IST
सचिव बेसिक शिक्षा परिषद से लेकर संयुक्त उप शिक्षा निदेशक तक की तय की गई जिम्मेदारी
एससीईआरटी के निदेशक ने जारी किया आदेश, अफसर हर माह करेंगे दो जिलों का निरीक्षण

सरकार ने प्रदेश भर के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गुणवत्तापरक शिक्षा एवं विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग के अफसरों को दी है। अफसर प्रतिमाह हर जिले का निरीक्षण कर शिक्षण कार्यक्रमों एवं अन्य शैक्षिक गतिविधियों का अनुश्रवण करेंगे और विद्यालय की गुणवत्ता के साथ शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। इसके लिए 39 अफसरों की जिम्मेदारी तय की गई है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
परिषदीय विद्यालयों की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए मूलभूत सुविधाओं की स्थापना, शिक्षकों की नियुक्ति एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था, छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली विभिन्न सुविधाएं सुनिश्चित हैं, लेकिन प्रदेश के अधिकांश विद्यालयों में गुणवत्तापरक शिक्षा एवं विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास अपेक्षा के मुताबिक नहीं हो रहा है। सरकार ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है, सो विद्यालयों के निरीक्षण की योजना बनाई गई। इसकी शुरुआत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, जनपदों में संचालित शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों एवं अन्य शैक्षिक गतिविधियों की निगरानी से होगी। शिक्षा महकमे के अफसर जिलों का दौरा करके इसका हाल देखेेंगे। निदेशक डॉ.सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने इसके लिए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा से लेकर संयुक्त उप शिक्षा निदेशक (एससीईआरटी) तक कुल 39 अफसरों की जिलेवार जिम्मेदारी तय की है। ये अफसर हर माह दो-दो जिलों का दौरा करेंगे।

निरीक्षण के मुख्य बिंदु

 डायट का निरीक्षण-डायट प्रपत्र के अनुसार
 विद्यालयों का निरीक्षण शिक्षा निदेशक (बेसिक) से निर्धारित प्रपत्र के अनुसार
न्यायालय में चल रहे वादों में शपथ पत्र दाखिल किए जाने तथा पैरवी की स्थिति
बीटीसी 2014, 2015 में प्रशिक्षण एवं बीटीसी 2017 में प्रवेश की स्थिति
डायट की ओर से ब्लाक संसाधन केंद्रों पर संचालित प्रशिक्षण की स्थिति
 जनसूचना पंजिका/निस्तारण की स्थिति
प्रशिक्षु शिक्षक चयन की स्थिति
 विभिन्न आयोगों से संबंधित प्रकरण
शिक्षक-शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना के अनुसार स्वीकृत कार्य
मुख्यमंत्री संदर्भ, आश्वासन, आईजीआरएस से संबंधित प्रकरण

डीआईओएस तलाशेंगे सेवानिवृत्त शिक्षक, राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त सहायक अध्यापक एवं प्रवक्ता के पदों पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की तलाश

ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Mon, 30 Oct 2017 09:02 PM IST
राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त सहायक अध्यापक एवं प्रवक्ता के पदों पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की तलाश जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) करेंगे। इन शिक्षकों की तैनाती माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से चयनित होकर अभ्यर्थियों के आने तक की जाएगी। इस अवधि में प्रवक्ता को प्रतिमाह 20 हजार रुपये एवं सहायक अध्यापक को 15 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। अपर मुख्य सचिव के आदेश के बाद अब डीआईओएस विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए सेवानिवृत्त शिक्षकों की नियुक्ति करेंगे।

मदरसों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ेगी सरकार, अगले सत्र से NCERT की किताबें पढ़ेंगे छात्र

टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 30 Oct 2017 09:23 PM IST
यूपी के 16 हजार से अधिक मदरसों में छात्रों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। उन्हें एनसीईआरटी की अंग्रेजी, गणित और विज्ञान की किताबें पढ़ाई जाएंगी। नई व्यवस्था अगले शिक्षण सत्र से लागू होगी। इनमें विज्ञान और गणित की पुस्तकें उर्दू भाषा में होंगी। इस पर मदरसों ने सहमति भी दे दी है। एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करने के लिए सरकार मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति भी करेगी।
उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने सोमवार को ट्वीट कर यह जानकारी दी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसों में मजहबी शिक्षा से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। उन्हें केवल मुख्य धारा से जोड़ने के लिए एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा का कहना है कि मुस्लिमों को वोट बैंक मानकर उन्हें आधुनिक शिक्षा से दूर रखा गया। केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार चाहती है कि मुस्लिम युवाओं के एक हाथ में पवित्र कुरान और दूसरे में कम्प्यूटर हो।

राजनीतिक हलकों और शिक्षा क्षेत्र में हलचल
योगी सरकार के इस फैसले से राजनीतिक हलकों और शिक्षा क्षेत्र में हलचल पैदा हो गई थी। जिस पर उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू होंगे, लेकिन मजहबी शिक्षा से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसों के विद्यार्थियों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए ही एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।

मुस्लिम युवाओं को आधुनिक शिक्षा से दूर रखा गया
डॉ. शर्मा ने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को बिना किसी जाति, धर्म व संप्रदाय के भेदभाव के विकास के समान अवसर मिले। सभी को आधुनिक शिक्षा का लाभ प्राप्त करने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मुस्लिम युवाओं को राजनीतिक इस्तेमाल तक सीमित रखा गया। वोट बैंक मानकर उन्हें आधुनिक शिक्षा से दूर रखा गया।

आधुनिक शिक्षा से जोड़कर नहीं कर रहे कोई पाप
उप मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि जिस मुस्लिम समुदाय ने अब्दुल कलाम जैसे राष्ट्रपति और अश्फाक उल्ला खां जैसे क्रांतिकारी दिए, उस समुदाय को शिक्षा से वंचित रखना महापाप था। तमाम मुस्लिम देशों के मदरसों में भी विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा दी जाती है। मुस्लिम युवाओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़कर सरकार कोई पाप नहीं कर रही, बल्कि इन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया है। कहा, पवित्र कुरान हम सबके लिए मान्य है।

शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा को हाईकोर्ट में चुनौती, प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती की प्रस्तावित लिखित परीक्षा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी की है।

विधि संवाददाता, इलाहाबाद
 प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती की प्रस्तावित लिखित परीक्षा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी की है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि याचिका लंबित रहने का यह आशय नहीं होगा कि कोर्ट ने इस मामले में कोई अंतरिम आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने शिक्षामित्र अनिल कुमार वर्मा व दिनेश कुमार की याचिका पर दिया है। याची के अधिवक्ता ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि बीते 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को शिक्षामित्रों का समायोजन रद करने के बाद शिक्षामित्र के रूप में ही बनाए रखने का विवेकाधिकार दिया है। राज्य सरकार ने टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को भी लिखित परीक्षा कराकर सहायक अध्यापक नियुक्त करने का आदेश जारी किया है। सरकार ने परीक्षा कराने का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना बताया है। अधिवक्ता ने शिक्षामित्रों की दलील दी कि शिक्षकों की लिखित परीक्षा शीर्ष कोर्ट के आदेश के अनुपालन को शून्य करने वाली है। शिक्षामित्र विशेष वर्ग से आते हैं इसलिए उन पर भर्ती की शर्ते थोपी नहीं जा सकती।
यदि परीक्षा करानी ही है तो उसमें गैर शिक्षामित्र को शामिल न किया जाए, बल्कि उनके ही वर्ग में कराई जाए। शीर्ष कोर्ट के निर्णय में लिखित परीक्षा का कोई प्रावधान नहीं था, हालांकि शासन को चयन प्रक्रिया निर्धारित करने और सेवा नियमावली में संशोधन का पूरा अधिकार है। कोर्ट में कहा गया कि शीर्ष कोर्ट ने विशेष तथ्य व परिस्थितियों को देखकर ही शिक्षामित्रों को आयु में छूट, भारांक व आगामी दो भर्तियों में अवसर देने को कहा है। शिक्षामित्रों को मूल पद पर वापसी का मामला शासन के विवेक पर छोड़ दिया था। कहा गया कि शासन एक ओर शीर्ष कोर्ट का अनुपालन करने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर लिखित परीक्षा कराकर आदेश को व्यर्थ कर रहा है।

चयन में फर्जीवाड़े के आसार, प्राथमिक स्कूलों के शिक्षक चयन में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद अब माध्यमिक कालेजों में शिक्षक भर्ती पर भी अंगुलियां उठ रही हैं।

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद: प्राथमिक स्कूलों के शिक्षक चयन में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद अब माध्यमिक कालेजों में शिक्षक भर्ती पर भी अंगुलियां उठ रही हैं। इसकी वजह यह है कि माध्यमिक कालेजों में शिक्षक बनने की अहम अर्हता बीएड ही रही है। वहां जालसाजी से इन्कार नहीं किया जा सकता है। चयन बोर्ड और मंडलों से शिक्षकों का चयन होने के बाद नियुक्ति कालेजों में मिली है, लेकिन उनके अभिलेखों की गहनता से जांच अब तक नहीं हुई है।
डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से 2004-05 के बीएड सत्र के परिणाम में फर्जी अंकतालिकाएं और प्रमाणपत्र पकड़े गए हैं।
प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक पद पर 4570 शिक्षक इन अंक पत्रों के आधार पर नौकरी पा चुके हैं, जिन पर कार्रवाई करने का निर्देश हुआ है। बेसिक स्कूलों में शिक्षक पद पर बीएड के साथ ही बीटीसी व अन्य प्रशिक्षण कोर्स करने वालों को भी नियुक्ति मिली है, ऐसे में यह संख्या कम हो सकती है, लेकिन प्रदेश के अशासकीय माध्यमिक कालेजों और राजकीय हाईस्कूल व इंटर कालेजों में हुई शिक्षक भर्तियों में बीएड प्रशिक्षण के आधार पर ही नियुक्तियां हुई हैं।

भर्ती की मांग पर अब प्रधानमंत्री से मिलेंगे प्रतियोगी, प्रदेश सरकार पर शोषण करने का लगाया आरोप 20 को पीएम से मिलने की योजना युवा मंच, बीएड उत्थान जनमोर्चा एवं युवा अधिकार मंच की बैठक में लिया गया निर्णय

युवा मंच, बीएड उत्थान जनमोर्चा एवं युवा अधिकार मंच अब बेरोजगार की समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री से मिलने की योजना बना रहा है। मंच के पदाधिकारियों ने साफ किया है कि प्रदेश सरकार ने युवाओं के हित में जल्द कदम न उठाया तो 20 नवंबर को दिल्ली में पीएम से मिलकर मुख्यमंत्री को हटाने का अनुरोध करेंगे।
मंच की सोमवार को प्रधान कार्यालय में हुई बैठक में कहा गया कि प्रदेश सरकार युवाओं के शोषण पर आमादा है। सरकार ने सभी भर्ती प्रक्रिया ठप कर दी है। सेवानिवृत्त शिक्षकों को संविदा पर रखने का निर्णय लिया गया है। इसकी वजह से प्रदेश के लाखों प्रतियोगी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कहा गया कि सरकार ने पहले उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग एवं माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का विलय कर शिक्षा सेवा चयन आयोग बनाने का शिगूफा छोड़ा। इसके नाम पर बोर्ड एवं आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों से इस्तीफा ले लिया गया और अब चयन बोर्ड और चयन आयोग के अलग-अलग गठन का निर्णय ले लिया।
बैठक में कहा गया कि जीआईसी में एलटी ग्रेड के 9342 पदों पर लिखित परीक्षा आश्वासन देकर सरकार अब प्रतिनियुक्ति करने जा रही है। इसके खिलाफ प्रतियोगियों ने न्यायालय में गुहार लगाई है। जब न्यायालय ने सरकार को फटकार लगाई तो माध्यमिक विद्यालयों में संविदा पर 26500 पदों पर सेवानिवृत्त शिक्षकों के समायोजन का दूसरा रुख अपनाया। सरकार को इस तरह के निर्णय को न्यायालय के माध्यम से रोकने का प्रयास किया जाएगा।

यूपी: शिक्षा विभाग में होगी 68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती, विज्ञापन दिसंबर में

यूपी: शिक्षा विभाग में होगी 68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती, विज्ञापन दिसंबर में

ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 31 Oct 2017 01:08 AM IST
यूपी के बेसिक शिक्षा विभाग में जल्द ही 68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती होगी। शिक्षक पात्रता भर्ती परीक्षा का परिणाम नवंबर के अंतिम सप्ताह तक जारी होने के बाद विभाग सहायक अध्यापक भर्ती का विज्ञापन जारी करेगा। विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव भेज दिया है।
शासन के उच्च स्तरीय अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव को मंजूरी के लिए जल्द ही वित्त विभाग को भेजा जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग में 1 लाख 37 हजार शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद छात्रों की संख्या के अनुपात में करीब 70 हजार से अधिक सहायक अध्यापक के पद रिक्त हो गए हैं। इससे शिक्षण व्यवस्था पर काफी असर पड़ रहा है।
बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम सिंह ने बताया कि प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

लिखित परीक्षा से होगी भर्ती

सहायक अध्यापक भर्ती लिखित परीक्षा से होगी। 150 अंकों की परीक्षा का पाठ्यक्रम भी जारी कर दिया गया है। शिक्षामित्रों को अधिकतम 25 भारांक देकर वरीयता दी जाएगी।

टीईटी का रिजल्ट नवंबर अंत में

प्रदेश में 15 अक्तूबर को आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2017 का परिणाम नवंबर के अंतिम सप्ताह में आएगा। टीईटी में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 9,76,760 अभ्यथिर्यों ने परीक्षा दी है। टीईटी का परिणाम जारी होने केबाद विभाग दिसंबर में सहायक अध्यापक भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करेगा।

दुद्धी, सोनभद्र : शिक्षक से अभद्र व्यवहार करने वाले युवक को पुलिस ने लिया हिरासत में

दुद्धी। कोतवाली क्षेत्र के डूमरडीहा गांव में नशे में धुत एक युवक ने बच्चो कोे घर से लेने गए शिक्षक से अभद्रता करने का मामला प्रकाश में आया है।घटना सोमवार की सुबह की है।पीड़ित शिक्षक की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।जानकारी के अनुसार सोमावर को निर्धारित समय पर प्राथमिक विद्यालय पहुंचा शिक्षक बच्चों की अपेक्षाकृत उपस्थिति बेहद कम देख वह बच्चों को लिवाने उनके घर की ओर जा रहा था।इस बीच गांव के नुक्कड़ पर नशे में धुत युवक पंकज अनाप शनाप बकने लगा।इस पर शिक्षक ने अनावश्यक विवाद न करने की सलाह देते हुए अपने कार्य में लग गया।इस बीच आरोपी युवक शिक्षक को धक्का देते हुए अपशब्दों का प्रयोग करने लगा। पीड़ित शिक्षक ने मामले से कोतवाली पुलिस व परिजनों को अवगत कराया।परिजनों संग आरोपी के घर पहुंची पुलिस को देख आरोपी व उसके परिजनों ने हो हंगामा मचाना शुरू कर दिया। बहरहाल हो हंगामे के बीच पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर कोतवाली लौट आई।

प्रेरक : अनपढ़ माँ ने तीन बेटियों को बनाया आरएएस


सोनभद्र : 4 नवम्बर 2017 को प्रस्तावित परीक्षा का समय हुआ परिवर्तित। उक्त परीक्षा अब 31 अक्टूबर 2017 को होगा आयोजित। 4 को रहेगा अवकाश


अब स्कूल में मिलेंगी 38 तरह की मुफ्त जांचें, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हर स्कूल में वर्ष में लगेगा कम से कम एक मेडिकल कैंप

■  हर स्कूल में वर्ष में लगेगा कम से कम एक कैंप
■  कैंप में एक डॉक्टर, नेत्र सहायक और स्टाफ नर्स रहेंगी मौजूद

फतेहपुर: राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत अब हर सरकारी स्कूल में मेडिकल कैंप लगेगा। मेडिकल कैंप में 18 साल तक के बालक बालिकाओं की 38 तरह की जांचे मुफ्त में होंगी। सेहत महकमे ने मेडिकल कैंप लगाने का माइक्रोप्लान तैयार करके डीएम के पास अनुमति के लिए भेजा है। मेडिकल कैंप में एक डॉक्टर, एक नेत्र सहायक और स्टाफ नर्स रहेगी। यह टीम कैंप में बच्चों के लंबाई, वजन, नेत्र दोष, दिव्यांगता समेत कुपोषण की जांचे मुफ्त करके उन्हें उपचार भी मुहैय्या कराएगी। 


वर्तमान में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित है। जिसके तहत सरकारी स्कूल व आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले हर च्च्चे को निश्शुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं देने का प्राविधान है। योजना के तहत स्कूलों में एक वर्ष में एक बार और आंगनबाडी केंद्रों में साल में दो बार बच्चों की 38 तरह की जांच होनी चाहिए। सेहत महकमें ने माइक्रोप्लान तैयार कर 13 ब्लाकों के सभी स्कूलों व आंगनबाडी केंद्रों में कैंप लगाने की तिथिवार सूची तैयार की है। जिसे अंतिम अनुमति के लिए डीएम के पास भेजा गया है। अनुमति के बाद ब्लाक-ब्लाक कैंप की तिथियां घोषित कर स्कूलों में कैंप आयोजित किए जाएंगे।

 कैंप में हर बच्चे का वजन, लंबाई, कुपोषण, नेत्र दोष, खून की जांच करके कुल 38 प्रकार की बीमारियों पर प्रतिरक्षण दिया जाएगा। सीएमओ डॉ. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि किस स्कूल में कैंप आयोजित हुआ या नहीं इसकी पुष्टि वह स्कूल के प्रधानचार्य से कराएंगे।

बेसिक शिक्षा परिषद के अध्यापक/अध्यापिकाओं के अनिवार्य जीवन बीमा नामांकन पत्र का प्रारूप


वाराणसी: 200 अंग्रेजी में दक्ष अध्यापकों का होगा अलग अलग विद्यालयों में तबादला


सरकारी स्कूलों में प्राथमिक से लेकर हाईस्कूल तक शिक्षा के बारे में आमतौर से धारणा यही है कि उनमें कुछ नवाचार नहीं होता, इसी का विश्लेषण करते पढ़े आज की दैनिक जागरण सम्पदाकीय


आरओ और एआरओ परीक्षा में ‘ओ’ लेवल कोर्स फिर अनिवार्य

इलाहाबाद : समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा में इस बार भी कंप्यूटर का ‘ओ’ लेवल कोर्स आवश्यक अर्हता में शामिल है। शासन ने अपनी ही मंशा को दरकिनार करते हुए इस बार आरओ, एआरओ परीक्षा के अधियाचन में अभ्यर्थियों के लिए ‘ओ’ लेवल कोर्स को अनिवार्य किया है। यूपीपीएससी एक दो दिनों में इस परीक्षा का विज्ञापन जारी कर सकता है। 1उप्र लोसेआ 2014 से अब तक आरओ एआरओ की यह तीसरी परीक्षा आयोजित कराने जा रहा है। पिछली दो परीक्षाओं में आयोग ने पाया कि इस परीक्षा के लिए ‘ओ’ लेवल कोर्स के अभ्यर्थी कम मिले थे। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अधिकांश छात्र आरओ, एआरओ परीक्षा में भी शामिल होते हैं। अमूमन वे कंप्यूटर के ‘ओ’ लेवल प्रमाण पत्र धारक नहीं होते हैं। ऐसे में समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी के पद पूरी तरह से भर नहीं पाते हैं। शासन की मंशा और परीक्षा के लिए अभ्यर्थी जुटाने की आ रही दिक्कतों को देखते हुए आयोग ने भी इस प्रमाण पत्र की अनिवार्यता खत्म करने का एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया। माना जा रहा था कि शासन इस बार परीक्षा में इसकी अनिवार्यता खत्म कर देगा लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। आरओ, एआरओ के नए अधियाचन में भी कंप्यूटर के ‘ओ’ लेवल प्रमाण पत्र को अनिवार्य किया गया है। जिसे देखकर आयोग सकते में आ गया। फिलहाल शासन की मंशा को ध्यान में रखते हुए इसका विज्ञापन आयोग में तैयार कराया जा रहा है। पांच सौ से अधिक पदों के लिए होने जा रही परीक्षा का विज्ञापन जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। आयोग के सचिव जगदीश ने बताया कि प्रस्ताव शासन से मंजूर नहीं हो सका है। इस प्रमाण पत्र के अभ्यर्थी कम ही मिलते हैं।

किताबों की ढुलाई में घोटाला: दो साल पहले नौ लाख, एक साल पहले आठ लाख में हुई ढुलाई

आगरा: बेसिक शिक्षा विभाग और सर्वशिक्षा अभियान कार्यालय में शिक्षा, संस्कार, चरित्र निर्माण और ईमानदारी की बातें अब बेईमानी सी लगती हैं। यहां अब की दीमक लग गई है। विभाग में किताबों की ढुलाई पर घोटाला हुआ, लेकिन यह पकड़ में तब आया जब इस साल मात्र एक तिहाई कीमत पर ढुलाई हो गई।
बेसिक शिक्षा विभाग के 2970 परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत मुफ्त किताबें मिलती हैं। ये किताबें पहले जिला मुख्यालय पर आती हैं। यहां से इन्हे बीआरसी और वहां से फिर स्कूलों तक पहुंचाया जाता है। सर्वशिक्षा अभियान के अशोक नगर कार्यालय द्वारा दो वर्ष पहले हुई पुस्तकों की ढुलाई का बिल नौ लाख बनाया और उसका भुगतान भी हुआ। एक साल पहले किताबों की ढुलाई के आठ लाख रुपये का भुगतान हुआ। वो भी दो भागों में। किताबें जिला मुख्यालय से महज ब्लॉक तक पहुंचाई गई। बिल भुगतान हुआ स्कूलों तक पहुंचाने का। स्कूलों तक किताबें पहुंचाई ही नहीं गई, लेकिन फर्जी बिल बनाकर भुगतान कर लिया गया। इस बार किताबों की ढुलाई पर महज तीन लाख रुपये का खर्चा आया है।
घोटाले में अफसरों की मिलीभगत: सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी का कहना है कि वाहन के अधिक चक्कर लगने से अधिक खर्चा हो गया था। अब सवाल ये है कि जरूरत से अधिक चक्कर क्यों किए गए। एक ही ब्लॉक पर एक बार में किताबें क्यों नहीं भेजी गई, बार-बार क्यों वाहन भेजा और कागजों में दर्शाया गया। बिल पास करते समय इसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया। क्या अधिकारियों की भी मिलीभगत थी, ढुलाई की अधिक राशि भुगतान हुआ तो इसका बंदरबांट किन-किन के बीच हुआ। ऐसे कई सवाल अब जवाब तलाश रहे हैं।सभी किताबों को ब्लॉक कार्यालयों पर पहुंचा दिया है। इसमें ढुलाई खर्चा करीब तीन लाख रुपये आया है। पूर्व वर्षो में किताबों की ढुलाई पर कितना खर्चा आया था, इसकी जानकारी नहीं है।
अनिल चौधरी, जिला समन्वयक
दो साल और एक साल पहले किताबों की ढुलाई पर खर्चा इसलिए अधिक हो गया था, क्योंकि ढुलाई वाहन के चक्कर अधिक हो गए थे। दो साल पहले करीब सात और एक साल पहले करीब छह लाख रुपये ढुलाई पर खर्च हुए थे।
बीएस राठौर, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी, सर्वशिक्षा अभियान कार्यालय
दो साल और एक साल पहले किताबों की ढुलाई पर कितने खर्च का भुगतान किया गया, इसकी मुङो जानकारी नहीं है। ढुलाई खर्चा में अधिक अंतर आ रहा है तो मामले की जांच कराई जाएगी।
अर्चना गुप्ता, बीएसए
किताबों की ढुलाई में विगत वर्षो से इस बार खर्चा आधे से भी कम हुआ है तो यह वित्तीय अनियमितता का मामला बनता है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। संबंधित कर्मचारी और अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा।
गिर्जेश चौधरी, सहायक निदेशक, बेसिक शिक्षा विभाग

आरओ और एआरओ परीक्षा में ‘ओ’ लेवल कोर्स फिर अनिवार्य


इलाहाबाद : समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा में इस बार भी कंप्यूटर का ‘ओ’ लेवल कोर्स आवश्यक अर्हता में शामिल है। शासन ने अपनी ही मंशा को दरकिनार करते हुए इस बार आरओ, एआरओ परीक्षा के अधियाचन में अभ्यर्थियों के लिए ‘ओ’ लेवल कोर्स को अनिवार्य किया है। यूपीपीएससी एक दो दिनों में इस परीक्षा का विज्ञापन जारी कर सकता है। 1उप्र लोसेआ 2014 से अब तक आरओ एआरओ की यह तीसरी परीक्षा आयोजित कराने जा रहा है। पिछली दो परीक्षाओं में आयोग ने पाया कि इस परीक्षा के लिए ‘ओ’ लेवल कोर्स के अभ्यर्थी कम मिले थे। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अधिकांश छात्र आरओ, एआरओ परीक्षा में भी शामिल होते हैं। अमूमन वे कंप्यूटर के ‘ओ’ लेवल प्रमाण पत्र धारक नहीं होते हैं। ऐसे में समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी के पद पूरी तरह से भर नहीं पाते हैं। शासन की मंशा और परीक्षा के लिए अभ्यर्थी जुटाने की आ रही दिक्कतों को देखते हुए आयोग ने भी इस प्रमाण पत्र की अनिवार्यता खत्म करने का एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया। माना जा रहा था कि शासन इस बार परीक्षा में इसकी अनिवार्यता खत्म कर देगा लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। आरओ, एआरओ के नए अधियाचन में भी कंप्यूटर के ‘ओ’ लेवल प्रमाण पत्र को अनिवार्य किया गया है। जिसे देखकर आयोग सकते में आ गया। फिलहाल शासन की मंशा को ध्यान में रखते हुए इसका विज्ञापन आयोग में तैयार कराया जा रहा है। पांच सौ से अधिक पदों के लिए होने जा रही परीक्षा का विज्ञापन जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। आयोग के सचिव जगदीश ने बताया कि प्रस्ताव शासन से मंजूर नहीं हो सका है। इस प्रमाण पत्र के अभ्यर्थी कम ही मिलते हैं।

कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों में शीतकालीन अवकाश की मांग



इलाहाबाद : आदर्श शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक रविवार को आयोजित की गई। इसमें कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर 25 दिसंबर से 10 जनवरी के मध्य अवकाश घोषित करने की मांग की गई। प्रदेश अध्यक्ष रूद्र प्रभाकर मिश्र ने कहा कि वर्ष 2014, 2015 में शीतकालीन अवकाश दिया गया था। सरकार पहले ही जयंती आदि के दर्जनभर अवकाश स्थगित कर चुकी है। उन्होंने कहा कि सेवारत शिक्षकों की लिखित परीक्षा का विरोध किया जाएगा

जिले के 1.28 लाख बच्चे जल्द पाएंगे स्वेटर


मैनपुरी। परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को सर्व शिक्षा अभियान के तहत एक और सुविधा उपलब्ध होने के लिए जा रही है। अब परिषदीय स्कूलों के बच्चों को नि:शुल्क स्वेटर उपलब्ध कराए जाएंगे। जनपद में इस योजना का लाभ 128722 बच्चों को मिलेगा।
इस संबंध में शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम ने बीएसए को पत्र जारी कर दिया है। बेसिक शिक्षा विभाग की मानें तो नवंबर में ही जिले के 1,28,722 बच्चों को स्वेटर उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

जिला समन्वयक एसके यादव ने बताया कि निदेशक के निर्देशानुसार कार्य चल रहा है। शीघ्र ही जनपद के बच्चों को स्वेटर उपलब्ध होंगे। बीएसए विजय प्रताप सिंह ने बताया कि निदेशक का पत्र प्राप्त हो चुका है। कार्रवाई शुरू कर दी गई है। स्वेटर प्राप्त होते ही बच्चों को उपलब्ध करा दिए जाएंगे।