मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन तथा न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने 11 मामले पर 92 पन्ने का अपना फैसला सुनाया। नियोजित शिक्षक आवेदकों की ओर से वरीय अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद सिंह, पीके शाही, दीनू कुमार, राजीव कुमार सिंह, सत्यम् शिवम् सुंदरम् तथा अरविंद कुमार शर्मा ने बहस में भाग लिया। वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर सहित विनयकृति सिंह तथा शिल्पा सिंह ने रखा।
नियमावली को दी थी चुनौती : आवेदकों की ओर से नियोजित शिक्षकों के लिए बनी नियमावली के नियम 6 एवं 8 की वैधता को चुनौती दी गई थी। उनके वकीलों ने नियम को गैर संवैधानिक बताते हुए कहा कि एक ही स्कूल में एक प्रकार के काम के लिए स्थायी शिक्षकों को अलग वेतन और नियोजित शिक्षकों को अलग वेतन दिया जा रहा है। जबकि स्थायी शिक्षक से कहीं ज्यादा काम नियोजित शिक्षक कर रहे हैं।
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