वाराणसी: यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं को कानपुर के चूहों से खतरा है। सुनने में अजीब लगता है लेकिन यह सच है। आलम यह है कि लाखों कॉपियां यहां आ तो चुकी हैं पर उन्हें बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। अफसर परेशान हैं कि इन्हें चूहों से कैसे सुरक्षित रखा जाए। कक्षों में दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। शहर को करीब 19 लाख कॉपियां बोर्ड की ओर से भेजी जानी हैं जिनमें तीन ट्रकों के माध्यम से तीन लाख कॉपियां भेज भी दी गई हैं।
सत्र 2017-18 में प्रदेश में करीब 65 लाख तो कानपुर में 1.20 लाख छात्र-छात्राएं परीक्षा में बैठेंगे। सिर्फ कानपुर में ही इनके लिए 19 लाख से अधिक कॉपियों की जरूरत होगी। इन्हें प्रस्तावित 147 सेंटरों को भेजा जाएगा। जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश कुमार तिवारी का कहना है कि यूपी बोर्ड परीक्षा में करीब 19 लाख कॉपियों की आवश्यकता होगी। इसे सुरक्षित रखने और कीट-चूहों से बचाने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। कॉपियों का वितरण परीक्षा से काफी पहले शुरू कर दिया जाएगा ताकि सेंटर इसे आसानी से सुरक्षित रख सकें। उनके लिए गाइड लाइन जारी की जाएगी।
हॉल बंद, फिर भी चूहे लगा रहे सेंध
राजकीय इंटर कॉलेज, चुन्नीगंज को उत्तर पुस्तिकाएं रखने का मुख्य सेंटर बनाया गया है। कॉलेज कैंपस बड़ा और खुला क्षेत्र होने की वजह से तीन लाख कॉपियां यहीं पर रखी गई हैं। कुछ दिनों से यहां चूहों की तादाद बढ़ गई है। जहां कॉपियां रखी हैं उस हॉल को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है इसके बाद भी चूहे सेंध लगा रहे हैं। अफसर मान रहे हैं कि यह चूहे कॉपियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। परीक्षा से पहले कॉपियां कहीं गलत हाथों में न चली जाएं इसके लिए प्रयास तो हो रहे हैं पर दो महीने तक इन्हें बचाना मुश्किल हो रहा है।
सेंटरों पर भी कम दिक्कत नहीं
कॉपियों को सिर्फ जीआईसी, चुन्नीगंज में ही नहीं बल्कि उन सेंटरों पर भी खतरा है जहां पर उन्हें टुकड़ों में रखा जाना है। इस सत्र में परीक्षा केंद्र कम हैं और हर सेंटर पर छात्रों की संख्या अधिक है। मजे की बात है कि चूहे हर जगह मुसीबत का सबब बने हुए हैं। कुछ दिनों बाद हर परीक्षा केंद्र पर कॉपियों की संख्या तो बड़ी तादाद में रहेगी पर हर जगह चूहों से निपटने की व्यवस्था नहीं है।
बचाव के लिए उठाए कदम
चूहों से बचाव के लिए कॉपियों को जिन कक्षों में रखा गया है वहां चूहे मार दवा के अलावा गैमेक्सीन पाउडर, चूना आदि का छिड़काव किया जा रहा है। ऐसा इसलिए ताकि कॉपियों में नमी के कारण दीमक न लगे। या चूहे किसी तरह प्रवेश भी कर जाते हैं तो कॉपियों को नुकसान न पहुंचा सकें।
अन्य बोर्ड क्या करते हैं
सीबीएसई और सीआईएससीई की छात्र संख्या कम होने के कारण उसके सामने इस तरह की चुनौतियां कम होती हैं। इनकी कॉपियां बैंकों के लॉकर आदि में सुरक्षित रखी जाती हैं जबकि यूपी बोर्ड की व्यवस्था इससे इतर है।
कानपुर का हाल
147 सेंटरों को 19 लाख कॉपियों की आवश्यकता
03 लाख उत्तर पुस्तिकाएं यूपी बोर्ड से भेज दी गईं
1.20 लाख छात्र-छात्राएं कानपुर में परीक्षा में बैठेंगे
सत्र 2017-18 में प्रदेश में करीब 65 लाख तो कानपुर में 1.20 लाख छात्र-छात्राएं परीक्षा में बैठेंगे। सिर्फ कानपुर में ही इनके लिए 19 लाख से अधिक कॉपियों की जरूरत होगी। इन्हें प्रस्तावित 147 सेंटरों को भेजा जाएगा। जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश कुमार तिवारी का कहना है कि यूपी बोर्ड परीक्षा में करीब 19 लाख कॉपियों की आवश्यकता होगी। इसे सुरक्षित रखने और कीट-चूहों से बचाने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। कॉपियों का वितरण परीक्षा से काफी पहले शुरू कर दिया जाएगा ताकि सेंटर इसे आसानी से सुरक्षित रख सकें। उनके लिए गाइड लाइन जारी की जाएगी।
हॉल बंद, फिर भी चूहे लगा रहे सेंध
राजकीय इंटर कॉलेज, चुन्नीगंज को उत्तर पुस्तिकाएं रखने का मुख्य सेंटर बनाया गया है। कॉलेज कैंपस बड़ा और खुला क्षेत्र होने की वजह से तीन लाख कॉपियां यहीं पर रखी गई हैं। कुछ दिनों से यहां चूहों की तादाद बढ़ गई है। जहां कॉपियां रखी हैं उस हॉल को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है इसके बाद भी चूहे सेंध लगा रहे हैं। अफसर मान रहे हैं कि यह चूहे कॉपियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। परीक्षा से पहले कॉपियां कहीं गलत हाथों में न चली जाएं इसके लिए प्रयास तो हो रहे हैं पर दो महीने तक इन्हें बचाना मुश्किल हो रहा है।
सेंटरों पर भी कम दिक्कत नहीं
कॉपियों को सिर्फ जीआईसी, चुन्नीगंज में ही नहीं बल्कि उन सेंटरों पर भी खतरा है जहां पर उन्हें टुकड़ों में रखा जाना है। इस सत्र में परीक्षा केंद्र कम हैं और हर सेंटर पर छात्रों की संख्या अधिक है। मजे की बात है कि चूहे हर जगह मुसीबत का सबब बने हुए हैं। कुछ दिनों बाद हर परीक्षा केंद्र पर कॉपियों की संख्या तो बड़ी तादाद में रहेगी पर हर जगह चूहों से निपटने की व्यवस्था नहीं है।
बचाव के लिए उठाए कदम
चूहों से बचाव के लिए कॉपियों को जिन कक्षों में रखा गया है वहां चूहे मार दवा के अलावा गैमेक्सीन पाउडर, चूना आदि का छिड़काव किया जा रहा है। ऐसा इसलिए ताकि कॉपियों में नमी के कारण दीमक न लगे। या चूहे किसी तरह प्रवेश भी कर जाते हैं तो कॉपियों को नुकसान न पहुंचा सकें।
अन्य बोर्ड क्या करते हैं
सीबीएसई और सीआईएससीई की छात्र संख्या कम होने के कारण उसके सामने इस तरह की चुनौतियां कम होती हैं। इनकी कॉपियां बैंकों के लॉकर आदि में सुरक्षित रखी जाती हैं जबकि यूपी बोर्ड की व्यवस्था इससे इतर है।
कानपुर का हाल
147 सेंटरों को 19 लाख कॉपियों की आवश्यकता
03 लाख उत्तर पुस्तिकाएं यूपी बोर्ड से भेज दी गईं
1.20 लाख छात्र-छात्राएं कानपुर में परीक्षा में बैठेंगे
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