दुद्धी । सरकार द्वारा भले ही बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की दावे की जा रही हो लेकिन सरकार द्वारा नियुक्त शिक्षक ही योजना को ठेंगा दिखाते हुए नजर आ रहे है जिससे सरकारी स्कूल में पढ़ने वालों बच्चो का भविष्य अँधेरे में जाती हुई दिख रही हैं ।सरकार हर साल शिक्षा पर करोड़ो रूपये का बजट बनाती हैं और हर साल अध्यापको पर करोड़ो रूपये खर्च करती हैं लेकिन जब अध्यापक ही अपनी जिम्मेदारी नहीं ले रहे हैं तो सरकार की मंशा कैसे सफल होगी ।यह कह पाना काफी मुश्किल है ।
बता दें कि ब्लॉक क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय सिधवादामर में कहने को तो अनुदेशक को लेकर चार शिक्षक तैनात किए गए हैं लेकिन अनुदेशक को छोड़ दिया जाय तो सरकारी अध्यापक कभी कभार स्कूल आते है और अपनी उपस्थिति दर्ज करके चलते बनते हैं ।बुधवार को जब उच्च प्राथमिक विद्यालय सिधवा दामर का जायजा लिया गया तो पता चला कि प्रधानाध्यापक सहित दो शिक्षक अनुपस्थित है जबकि दोनों अनुदेशक मौजूद रहे हैं ।पूछने पर बच्चों ने एवं आसपास के अभिभावकों ने बताया कि गुरुजी नियमित तौर पर नही रहते हैं कभी कभी विद्यालय आते है तो कभी मीटिंग तो कभी कागजी कार्यो में उलझे रहते हैं उनके पास तो कक्षा में जाने का समय ही नही बचता है ।जबकि उक्त विद्यालय में 72 बच्चे नामांकित बताएं गये ।जबकि मौके पर मात्र 31 बच्चे उपस्थित रहे ।
अभिभावकों ने कहा कि अगर चारो शिक्षक 72 बच्चों को ढंग से पढ़ाए तो बच्चे किसी नर्सरी विद्यालय से कम तेज नही होंगे लेकिन न जाने कब सरकारी अध्यापक अपनी जबाबदेही समझेंगे यह कहना मुश्किल है ।
बता दें कि ब्लॉक क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय सिधवादामर में कहने को तो अनुदेशक को लेकर चार शिक्षक तैनात किए गए हैं लेकिन अनुदेशक को छोड़ दिया जाय तो सरकारी अध्यापक कभी कभार स्कूल आते है और अपनी उपस्थिति दर्ज करके चलते बनते हैं ।बुधवार को जब उच्च प्राथमिक विद्यालय सिधवा दामर का जायजा लिया गया तो पता चला कि प्रधानाध्यापक सहित दो शिक्षक अनुपस्थित है जबकि दोनों अनुदेशक मौजूद रहे हैं ।पूछने पर बच्चों ने एवं आसपास के अभिभावकों ने बताया कि गुरुजी नियमित तौर पर नही रहते हैं कभी कभी विद्यालय आते है तो कभी मीटिंग तो कभी कागजी कार्यो में उलझे रहते हैं उनके पास तो कक्षा में जाने का समय ही नही बचता है ।जबकि उक्त विद्यालय में 72 बच्चे नामांकित बताएं गये ।जबकि मौके पर मात्र 31 बच्चे उपस्थित रहे ।
अभिभावकों ने कहा कि अगर चारो शिक्षक 72 बच्चों को ढंग से पढ़ाए तो बच्चे किसी नर्सरी विद्यालय से कम तेज नही होंगे लेकिन न जाने कब सरकारी अध्यापक अपनी जबाबदेही समझेंगे यह कहना मुश्किल है ।
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