सोनभद्र : प्राइमरी स्कूल के मास्टर साहब माध्यमिक की कमी करेंगे पूरी, शिक्षा व्यवस्था में होगा सुधार



जागरण संवाददाता, सोनभद्र : अगर शिक्षकों की नियुक्ति परिषदीय प्राथमिक विद्यालय में हुई है और उनके पास योग्यता माध्यमिक स्तर के बच्चों को पढ़ाने के लायक है तो उन्हें अब माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने के लिए भेजा जाएगा। हालांकि इस दौरान वेतन परिषदीय स्कूल का ही मिलेगा। शासन के इस निर्णय से माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी पूरी होगी। यह सबकुछ 15 सितंबर तक पूर्ण कर लिया जाएगा। शिक्षा विभाग की तरफ से इसकी कवायद भी शुरू कर दी गई है।1 जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की संख्या छात्र अनुपात से अधिक अनुमानित की गई है। ऐसे में सर प्लस शिक्षकों की अलग से सूची तैयार की जा रही है। इसमें से योग्यता के अनुसार कुछ शिक्षकों को माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य के लिए भेजा जाएगा। जिला विद्यालय निरीक्षक राजशेखर सिंह ने बताया कि राजकीय इंटर कालेजों, राजकीय बालिका इंटर कालेजों, माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड यानि दसवीं तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की भारी कमी है। इस कमी को पूरा कराने के लिए शासन स्तर से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। निर्णय के अनुसार परिषदीय स्कूलों के ऐसे शिक्षक जिनके पास एलटी ग्रेड की योग्यता है, उन्हें प्रतिनियुक्ति के आधार पर रखा जाएगा। इसके अलावा राजकीय, सहायता प्राप्त, शासकीय विद्यालयों से सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी प्रतिनियुक्ति के आधार पर रखने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 15 सितंबर तक प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। 1शिक्षा व्यवस्था में होगा सुधार1सोनभद्र : माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के चलते वहां अपने पाल्यों का नाम लिखवाने से अभिभावक कतराते हैं। वे कहते हैं कि खर्च भले कम लगता है लेकिन यहां गुणवत्तायुक्त शिक्षा नहीं मिल पाती। हर अभिभावक यहीं चाहता है कि उसके लाडले का नाम ऐसे स्कूल में लिखा हो जहां नियमित कक्षाएं चलती हो। गुणवत्ता शिक्षा देने को शिक्षक हों। अब शासन के इस निर्णय से सरकारी माध्यमिक स्कूलों में जब शिक्षकों की कमी पूरी होगी तो गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिलने लगेगी।

सोनभद्र : माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के चलते वहां अपने पाल्यों का नाम लिखवाने से अभिभावक कतराते हैं। वे कहते हैं कि खर्च भले कम लगता है लेकिन यहां गुणवत्तायुक्त शिक्षा नहीं मिल पाती। हर अभिभावक यहीं चाहता है कि उसके लाडले का नाम ऐसे स्कूल में लिखा हो जहां नियमित कक्षाएं चलती हो। गुणवत्ता शिक्षा देने को शिक्षक हों। अब शासन के इस निर्णय से सरकारी माध्यमिक स्कूलों में जब शिक्षकों की कमी पूरी होगी तो गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिलने लगेगी।

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