सोनभद्र : गुरु! अब त गइल मास्टरी, कैसी होई आगे क लड़ाई

सोनभद्र : गुरु! अब त गइल मास्टरी, कैसी होई आगे क लड़ाई। कुछ इसी तरह की स्थिति हो गई है इनदिनों बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात शिक्षामित्रों की, कोर्ट के आये निर्णय के बाद से। न उनको आगे का रास्ता दिख रहा है न पीछे का। घर परिवार को लेकर चिंता बढ़ गई है। बच्चों की पढ़ाई व फीस का भी बंदोबस्त करना टेढ़ीखीर साबित होने लगा है। नियुक्ति के समय संयोए गए सभी सपने चूर हो गये हैं। हालांकि अभी सरकार से कुछ आस लगी है फिर भी उसमें लेकिन है..। 1 2001 में जब शिक्षामित्रों की नियुक्ति को लेकर सरकार ने योजना शुरू की तो गांव-गिरांव के उन लोगों के खुशी का ठिकाना नहीं रहा जो पढ़-लिखकर घर में बैठे थे। ऐसे लोगों को मेरिट के आधार पर नियुक्ति मिल गयी। यह क्रम 2006 तक तो चला लेकिन इसमें भी वही खेल शुरू हो गया जो अन्य नियुक्तियों में होता चला आया है। कोई नकल के सहारे हाईमेरिट में जुट गया तो कोई जुगाड़ के सहारे, हालांकि सभी आ गये शिक्षामित्रों की श्रेणी में। 1इसी बीच 07 से 09 तक इनकी नियुक्ति पर ब्रेक लग गया। फिर 2010 में पुन: नियुक्ति शुरू हुई और विशेष परिस्थितियों में इनकी नियुक्ति की गई। इसी बीच प्रदेश में सत्तासीन कुछ सरकारें,, जिन्होंने इनके भविष्य की चिंता नहीं की और तरह-तरह के प्रलोभन देकर उनको वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। यह भी उन सरकारों के झांसे में आकर यह समझ गये कि अब तो हम प्रदेश सरकार के शिक्षकों की उस कतार में खड़े हो गये जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग में तैनाती पाये अन्य शिक्षक हैं। हमारा अब क्या होगा। इस दौरान उनके माता-पिता के साथ ही खुद के शिक्षमित्रों ने भी जीवन के उन उड़ानों की ओर कदम बढ़ाया जिसके लिए हर मनुष्य संघर्षशील रहता है। 1 इसी बीच सुप्रीमकोर्ट ने इन्हें लेकर एक ऐसा फैसला दे दिया कि किसी के समझ में नहीं आया कि अब आगे क्या होगा। जीवन की ऊंची उड़ान को लेकर संयोए गये इनके सभी सपने चकनाचूर हो गये। घर-परिवार के लोगों में भी चिंता हो गई कि अब इनके जीवन की लड़ाई आगे कैसे लड़ी जाएगी। इसे लेकर कहीं जिला स्तर पर धरना तो कहीं प्रदेशस्तर पर आंदोलन चल रहा है लेकिन कुछ स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है, हालांकि प्रदेश सरकार ने जो रास्ता टीईटी का सुझाया है वह एक आस जरूर बांध रहा है लेकिन उनकी चिंता बढ़ी जो जुगाड़ की गाड़ी के सहारे जीवन की नैया पार करने की सोचे थे। ऐसे में एक बात तो सच है कि मेहनत व लगन से किये गये हर कार्य को सफलता मिलती है। ऐसे में संकट की घड़ी में हतोत्साहित नहीं होना चाहिए।

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