सोनभद्र : .तो गलत तथ्यों को ही पढ़ेंगे बच्चे, सामाजिक विज्ञान के किताब में रिहंद बांध से संबंधित सही जानकारी न दिये जाने से परीक्षार्थी तथ्यों की सही जानकारी नहीं हासिल कर सकेंगे।

रिहंद बांध से संबंधित मुख्य जानकारियां एक नजर में 1बांध की लंबाई>>3066 फीट 1बांध की ऊंचाई>>300 फीट 1बांध की ऊपरी चौड़ाई>>24 फीट 1बांध की आधार चौड़ाई>>275 फीट 1समुद्र तल से बांध की ऊंचाई>>894.5 फीट 1टेण्टर गेट>>13 फाटक 1प्रत्येक फाटक>>40731.5 फीट का है। 1जलाशय का कैचमेंट क्षेत्रफल>>5148 वर्ग मील 1जलाशय का क्षेत्रफल>>180 वर्ग मील 1जलाशय की क्षमता>>8600 एकड़ फीट 1औसत वार्षिक जलाग्मन>>51380 एकड़ फीट 1जलाशय की अधिकतम क्षमता>>880 फीट 1टरबाइन की उत्पादन क्षमता>>6750=300 मेगावाट 1टरबाइन की गति>>150 आरपीएम 1परियोजना में व्यय>>51.52 करोड़ 1रिहंद बांध का शिलान्यास>>13 जुलाई 1954 1रिहंद बांध का उद्घाटन>>छह जनवरी 1963 1गो¨वद वल्लभ पंत सागर यूपी की सबसे बड़ी परियोजना है।1


जागरण संवाददाता, सोनभद्र/रेणुकूट : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल सामाजिक विज्ञान के परीक्षार्थी इस बार भी तथ्यों की सही जानकारी नहीं हासिल कर सकेंगे। ..क्योंकि उनकी किताब में पढ़ाये जाने वाले बहुउद्देशीय परियोजनाएं अध्याय में रिहंद जलाशय से जुड़ी कुछ गलत जानकारी लिखी है। गत कई वर्षों से इसी तथ्य के साथ पढ़ाते आए शिक्षकों को भी अब चिंता हो रही है कि आखिर पढ़ाया क्या जायेगा। किताब में जो लिखा है वह या फिर वास्तविकता में जो है वह। अभिभावकों व शिक्षकों ने किताब में लिखी जानकारी को संशोधित कराते हुए सही जानकारी प्रकाशित कराने की मांग की है। 110 वीं कक्षा में मान्यता प्राप्त लगभग सभी प्रकाशन की किताबों में प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएं जल संसाधन के अध्याय में रिहंद बांध परियोजना से संबंधित जानकारियां दी गई हैं। उसमें अधिकांश तथ्य वास्तविकता से अलग दर्शाए गये हैं। किताब में दी गई जानकारी पर गौर करें तो तीन सौ मेगावाट का जल विद्युत गृह ओबरा में दर्शाया गया है जबकि वास्तव में यह विद्युत गृह पिपरी में स्थापित है और ओबरा में तीन इकाइयों से 99 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन किया जाता है। गो¨वद वल्लभ पंत सागर (रिहंद) से न तो कहीं नहर निकाली गई है और न ही सिंचाई की कोई व्यवस्था की गई है। पुस्तक में 600 किमी की नहर भी निकाल दी गई है। इतना ही नहीं किताब के अनुसार 34 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई भी की जाती है जो की पूरी तरह से गलत है। इसके इतर रिहंद बांध परियोजना छह जनवरी 1963 में पूरी तरह से बनकर तैयार हो गयी थी, जिसका उद्घाटन देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने की थी। किसी पुस्तक में इसे 1966 में तो किसी में 1956 लिखा गया है। रेणु नदी पर निर्मित रिहंद बांध को सोन नदी पर लिखा गया है। कहीं-कहीं यह भी दर्शाया गया है कि रिहंद बांध के नीचे चार सुरंगें बनाई गई हैं जिससे तलहटी में जमे कचरे की सफाई की जा सके। 1बोले अधिकारी - इस संबंध में सिंचाई विभाग पिपरी के अधिशासी अभियंता राम विलास सिंह यादव का कहना है कि पुस्तक में दर्शाए गए अधिकांश आंकड़े तथ्यों से परे हैं। इसमें सुधार की आवश्यकता है। इससे बच्चों को हकीकत से रूबरू कराया जा सके। अब यही देखना होगा कि सामाजिक विज्ञान के बच्चों के उत्तर को अध्यापक किस तरह से सही-गलत का आंकलन कर नंबर देते हैं।माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल सामाजिक विज्ञान में अगर किसी अध्याय में कोई गलत तथ्य दिया गया है तो इसकी जिम्मेदारी प्रकाशन और राइटर की होती है। वैसे रिहंद बांध से संबंधित सही जानकारी मैं वहां के अधिकारियों से पत्रचार के माध्यम से मंगाऊंगा फिर उसे निदेशालय को भेजकर सही करवाने की पूरी कोशिश होगी। 1-प्रभु राम चौहान, डीआइओएस।

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