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सोनभद्र : हर साल दाखिला फीस का खेल एक ही स्कूल में पढ़ने के बावजूद अभिभावकों से वसूलते हैं फीस अनदेखी,
जागरण संवाददाता, सोनभद्र : पब्लिक और प्राइवेट स्कूलों में इनदिनों गजब का तमाशा चल रहा है। जिले में खुले तमाम स्कूल नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए छात्रों के पुन: प्रवेश के नाम पर फीस वसूल रहे हैं। अभिभावक त्रहिमाम कर रहे हैं, बावजूद इसके न तो अधिकारी इस पर ध्यान दे रहे हैं और न ही कोई शिक्षण एसोसिएशन इस मुद्दे को उठाता है। जब कभी अभिभावक अपने बच्चे के एडमिशन के दौरान पुन: उसी स्कूल में प्रवेश के नाम पर की जाने वाली वसूली का विरोध करते हैं तो उन्हें संबंधित स्कूलों की तरफ से नाम काटने की धमकी दी जाती है। सूबे में बनी भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा माफियाओं के खिलाफ अभियान छेड़ा है तो अभिभावकों को एक उम्मीद जगी है। 1योगीराज में नए फरमान के असर की जब जागरण ने पड़ताल की तो पब्लिक व प्राइवेट स्कूलों की सच्चाई खुलकर सामने आयी। मुख्यमंत्री ने पुन: प्रवेश के नाम पर लिए जाने वाले शुल्क को बंद करने की बात कही है तो स्कूल प्रबंधन के लोग इसे दूसरे मद में लेने की रणनीति बना लिये हैं। आलम यह है कि प्राइवेट व पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों से हर साल एक हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक का शुल्क पुन: प्रवेश के नाम ली जाती है। इतना ही नहीं अन्य मदों में भी फीस ली जाती है। इस बेतहाशा फीस वृद्धि से अभिभावकों की कमर टूट गयी है। 1बोले बीएसए..1जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमरनाथ सिंह ने इस संबंध में बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो फरमान जारी किया है उसका आदेश जिले में जैसे ही आएगा, इस पर गंभीरता से काम होगा। स्कूलों का पता करके कि कहां-कहां री-एडमिशन के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।
सोनभद्र : अगर कोई बच्चा किसी स्कूल में पढ़ता है तो उसे अगले साल अगली कक्षा में प्रवेश देने के लिए उसी स्कूल के प्रबंधन द्वारा री-एडमिशन के नाम पर शुल्क लिया जाता है। यह बात किसी एक या दो स्कूल में नहीं बल्कि सभी स्कूलों की है। हर्ष नगर की ¨पकी सिंह ने बताया कि उनकी बेटी कक्षा छह से सात में गयी है। री-एडमिशन के नाम पर तीन हजार रुपये लिया गया है। यह शुल्क हर साल लिया जाता है। इसी तरह विकास नगर की इंदू श्रीवास्तव ने बताया कि उनका बेटा चार से पांच में पढ़ने गया है। साथ ही उनकी बेटी 11वीं से 12वी में गयी है। उनसे बेटे का 1300 रुपये और बेटी का भी 1300 रुपये री-एडमिशन के नाम पर शुल्क लिया गया है। गतवर्ष भी री-एडमिशन के नाम पर शुल्क लिया गया। उन्होंने बताया कि एक बार हमने स्कूल प्रबंधन से इस संबंध में पूछा था तो वहां से कहा गया कि अगर नहीं देना है तो आप स्वतंत्र हैं किसी भी स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ा सकती हैं। 1
विरोध करने पर स्कूल से नाम काटने या प्रवेश न लेने की भी देते हैं धमकी शिक्षण एसोसिएशन से जुड़े लोग भी फीस वृद्धि का मुद्दा नहीं उठाते हैं
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