जागरण संवाददाता, सोनभद्र : जिले में बिना मान्यता के संचालित हो रहे स्कूलों के संचालकों को न तो किसी तरह के नोटिस का डर है और न ही चेतावनी का। गतदिनों जिले के सभी ब्लाकों में खंड शिक्षा अधिकारियों ने ऐसे स्कूल संचालकों को नोटिस जारी कर तत्काल मान्यता कराने के लिए कहा था। मान्यता न कराने पर स्कूल का संचालन बंद करने की चेतावनी दी गई थी लेकिन महज गिने-चुने संचालकों ने ही अपनी पत्रवली नामांकन के लिए आगे बढ़ाई। ऐसे में विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।1उदाहरण के तौर पर राबट्र्सगंज ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारी आलोक कुमार ने जनवरी के अंतिम सप्ताह में बिना मान्यता के संचालित हो रहे स्कूलों को नोटिस जारी की थी। कुल 75 स्कूलों को नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर मान्यता के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई थी। आगाह किया गया था कि 15 दिनों के भीतर मान्यता की फाइल पूरी नहीं करते हैं तो वे स्कूल का संचालन नहीं करेंगे। हैरत की बात यह है कि कई माह बीत जाने के बावजूद महज चार स्कूलों के प्रबंधकों ने ही मान्यता के लिए फाइल शिक्षा विभाग में जमा की। जिसकी जांच चल रही है। जिन लोगों ने मान्यता के लिए फाइल जमा नहीं की है, उनके खिलाफ शिक्षा विभाग के अधिकारी कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं लेकिन सच्चाई यही है कि महकमे के अधिकारी भी इस मामले में गंभीर नहीं हैं। बिना मान्यता के संचालित हो रहे स्कूलों में बच्चों व उनके अभिभावकों को ठगा जा रहा है। ऊंची फीस के अलावा तमाम तरह के ढकोसले को अपना कर अभिभावकों की जेब ढीली की जा रही है। कई स्कूल के प्रबंधक तो कोचिंग के नाम पर भी बच्चों का दोहन कर रहे हैं लेकिन यह सब जानते हुए भी शिक्षा विभाग के अधिकारी अनजान बने हुए हैं। 1समय से फीस जमा न होने पर बच्चों को मिलती है सजा 1बिना मान्यता के संचालित होने वाले स्कूलों में समय से फीस जमा न होने पर बच्चों को सजा भी दी जा रही है। उन्हें बेंच पर खड़ा करा दिया जा रहा है तो किसी छात्र को मुर्गा तक बनवाया जा रहा है। जिसकी वजह से सजा पाने वाले बच्चों में कुंठा की भावना घर कर रही है लेकिन यह महकमे के अधिकारियों को नहीं दिख रहा है। सूत्रों का कहना है कि बिना मान्यता संचालित स्कूल को नोटिस जारी कर संबंधित विभागीय अधिकारियों ने अपना बचाव किया है। यदि ऐसे स्कूलों को बंद कराने में गंभीर होने तो नोटिस जारी होने के बाद कई माह नहीं निकल जाता। मौजूदा समय में प्रवेश भी चल रहा है। बिना पंजीयन संचालित स्कूलों में प्रवेश के लिए अभिभावकों का मेला लग रहा है। अभिभावकों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए तमाम तरह के लुभावने वायदे भी किए जा रहे हैं।
संबंधित महकमे की सुस्ती से नहीं कस पा रहा शिकंजा
ठगे जा रहे छात्र व अभिभावकों की नहीं है किसी को फिक्रनोटिस के बाद महज चार लोगों ने ही मान्यता के लिए फाइल जमा की है। जिन लोगों ने मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया उनकी सूची जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेज दी गई है। जल्द ही शिक्षा विभाग के अधिकारी ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई करेंगे।
