सोनभद्र : फैसले के बाद 1193 शिक्षामित्र दायरे में।। जिले में कुल दो चक्रों में किया गया था शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन। 1135 शिक्षामित्र जिले में समायोजन से रह गए थे वंचित। बीएसए के पास अभी नहीं आया है कोई पत्र या मेल




जागरण संवाददाता, सोनभद्र : पहले ग्राम पंचायत में निकली नियुक्ति को भरकर शिक्षामित्र बने, कुछ पैसे भी मिलने लगे। आगे चलकर जब संख्या अधिक हुई तो यूनियन बन गया। सहायक अध्यापक बनाने की मांग बुलंद हुई। दबाव में आयी सरकार ने इन्हें शिक्षामित्र के पद से सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित भी कर दिया लेकिन इसी बीच मामला न्यायालय में पहुंच गया। 1 पहले हाईकोर्ट ने नियुक्ति को अवैध कराकर दिया। इससे नाराज शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। लंबी अवधि तक मामला चला। इसके बाद मंगलवार को जो फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया उससे जिले के 1193 शिक्षकों के पैर तले जमीन ही खिसक गई। न्यायालय के फैसले के अनुसार अब उन्हें शिक्षामित्र के पद पर बैक होना पड़ेगा। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग व बीएसए को अभी किसी पत्र या मेल नहीं मिला है।1 विभाग को किसी कार्रवाई के लिए शासन के पत्र का इंतजार है। शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने 1193 शिक्षामित्रों की जिंदगी की गाड़ी बड़े ही ¨बदास तरीके से गुजर रही थी। जिनका समायोजन नहीं हुआ था वे भी इस उम्मीद में थे कि उनका भी समायोजन होगा और 3500 के मानदेय से सीधे 35 हजार रुपये मानदेय मिलेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उनके मंसूबे पर पानी फिर गया। इधर, बुधवार को जिले के विभिन्न इलाकों में शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने शिक्षामित्रों से विरोध दर्ज कराया। 136 माह से ले रहे थे मानदेय1सोनभद्र : जिले में शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन दो सत्र में कराया गया था। पहले सत्र में समायोजन अगस्त 2014 में हुआ था। उस दौरान जिले के 583 शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाया गया था। यानि ये 36 माह से सहायक अध्यापक पद का मानदेय ले रहे थे। इसी तरह वर्ष 2015 में समायोजित हुए 610 शिक्षामित्र 24 महीने से सहायक अध्यापक का मानदेय ले रहे थे। यानि शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने 1193 शिक्षकों की नौकरी खतरे में है। 1काफी दिन तक नौकरी करने के बाद शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन हुआ था। तब जाकर ठीक-ठाक वेतन मिल रहा था। अब न्यायालय ने जो फैसला सुनाया है उससे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आगे क्या होगा। 1- पुष्पा पांडेय, परिजन। 1वर्ष 2015 में समायोजन हुआ था। तब से सहायक अध्यापक का मानदेय मिल रहा है। उसी हिसाब से खर्च भी होता है। महीने में औसतन 20 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। अब आगे क्या होगा भगवान ही जानें। 1- धीरेंद्र कुमार, शिक्षामित्र (सहायक अध्यापक)।1न्यायालय ने शिक्षामित्रों के संबंध में जो फैसला सुनाया है उस पर पुर्नविचार करना चाहिए। सहायक अध्यापक बनने और उतना मानदेय मिलने के बाद स्टेटस उस तरह का हो जाता है। 1अशोक सिंह, शिक्षामित्र (सहायक अध्यापक)।1बोले शिक्षामित्र व उनके परिजन1सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है उससे संबंधित अभी जिले में कोई पत्र या मेल नहीं आया है। राज्य सरकार की तरफ से जैसा भी निर्देश आएगा उस हिसाब से आगे की कार्यवाही की जाएगी। 1डा. गोरखनाथ पटेल, बीएसए, सोनभद्र।सभी शिक्षामित्रों को तत्काल समान कार्य, समान वेतन लागू करें। सुप्रीम कोर्ट के समायोजन रद हुए आदेश को संविधान पीठ में पुर्नविचार याचिका रिट दाखिल की जाय। प्रदेश सरकार से हमारी मांग है कि ऐसी स्थिति में कुछ बीच का रास्ता निकाले। जिससे कि शिक्षामित्रों का भला हो सके। 17 साल तक सेवा देने वाले शिक्षामित्रों के साथ किसी भी तरह से अन्याय नहीं होना चाहिए। अपनी मांगों के लिए हम अनिश्चित कालीन धरना देंगे। 1- वकील अहमद खां, जिलाध्यक्ष, आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिशएशन।

No comments:

Post a Comment