सोनभद्र : शिकायतों का निस्तारण न करना 28 अधिकारीयों को पड़ा महंगा, जिलाधिकारी ने रोका बेतन। फेहरिस्त में बेसिक शिक्षा अधिकारी और डीआईओएस भी शामिल

सोनभद्र। समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली/आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से प्राप्त हो रही शिकायतों को नजरअंदाज कर समय से निस्तारण न करना पदीय दायित्वों का उल्लंघन है, लिहाजा लोकप्रिय सरकार की मंशा के मुताबिक काम न करने वाले लापरवाह अधिकारी वेतन के पात्र नहीं हो सकते अथवा तत्काल अपने कार्यों में सुधार लाते हुए डिफाल्ट हुए प्रकरण कों निस्तारित करें अन्यथा की स्थिति में गंभीर परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहें।उक्त आदेश जिलाधिकारी प्रमोद कुमार उपाध्याय ने समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली/आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के डिफाल्टर होने पर 28 लापरवाह अधिकारियों का माह जून 2017 का तनख्वाह रोकने के निर्देश सम्बन्धित को दिये हैं। जिलाधिकारी ने समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली/आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हुए पाया कि जिले के कुछ अधिकारियों द्वारा जनता की शिकायतों के निस्तारण में रूचि नहीं ली जा रही है, जिसकी वजह से जिले के 133 प्रकरण डिफाल्टर की श्रेणी में हो गये हैं, जो आपत्ति जनक है, जिस पर जिलाधिकारी ने डिफाल्ट वाले विभागोें के कार्यालयाध्यक्षों जैसे उप जिलाधिकारी सदर, उप जिलाधिकारी दुद्धी, उप जिलाधिकारी घोरावल, तहसीलदार दुद्धी, डी0सी0 मनरेगा, खण्ड विकास अधिकारी चतरा, अधि0 अभि0 ओबरा तापीय परियोजना, अधि0 अभि0 विद्युत राबर्ट्सगंज, अधि0 अभि0 विद्युत पिपरी, जिला पंचायत राज अधिकारी, खान अधिकारी, खान निरीक्षक, अधिशासी अभियन्ता प्रा0ख0, अधीक्षक अभियन्ता पीडब्ल्यूडी, प्रभागीय वनाधिकारी ओबरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, सचिव मण्डी, सहायक अभि0-साडा, अपर मुख्य अधिकारी जिला पचायत, अधि0 अभि0 लघु सिंचाई, अधि0 अभि0 जल निगम, जिला आबकारी अधिकारी, स0 महानिरीक्षक निबन्धन, अधि0 अधि0 नगर पंचायत रेकुकूट व जिला कार्यक्रम अधिकारी का वेतन रोकने का निर्देश जारी करते हुए वरिष्ठ कोषाधिकारी को निर्देशित किया है कि जब तक प्रभारी अधिकारी (आईजीआरएस)/बन्दोबस्त अधिकारी (चकबन्दी) शिकायत द्वारा शत-प्रतिशत शिकायतों के निस्तारण का प्रमाण-पत्र प्राप्त न हो, तब तक लापरवाह अधिकारियों का वेतन आहरित न किया जाय। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे लम्बित प्रकरणों का निस्तारण सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर करते हुए आईजीआरएस पोर्टल पर अपलोड कराना सुनिश्चित करें।

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