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कूड़ा बीनने वाले बच्चों को शिक्षित बना रहे डा. आशीषवाराणसी : कूड़ा बीनने वाले बच्चों को शिक्षित कर उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने के लिए बीएचयू इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. राजीव श्रीवास्तव ने घर-बार त्याग दिया। वर्ष 1989 में उन्होंने विशाल भारत नामक संस्था बनाकर ऐसे बच्चों के लिए कार्य शुरू किया। हुकुलगंज के वरुणापुरम् स्थित किराये के मकान में उनके साथ ऐसे करीब 35 बच्चे रहते हैं। उनके पढ़ने-लिखने, खाने-पीने समेत पूरा खर्च डा. राजीव स्वयं उठाते हैं। इसके लिए वह किसी से सहयोग लेने की जगह अपना वेतन इसमें लगाते हैं। शादी करने के बाद भी इन्हीं बच्चों को उन्होंने अपनी संतान और परिवार जाना। उनके उत्थान को अपने जीवन का भी उद्देश्य व अभियान माना।1 डा. आशीष के कुटुम्ब ग्राम में 45 गरीब बच्चे पा रहे शिक्षा1रेलवे स्टेशन पर घुमंतू बच्चों के पुनर्वास के लिए डा. आशीष ने वर्ष 2002 में ‘कुटुम्ब’ नामक संस्था बनाई। इसके माध्यम से उन्होंने नदेसर स्थित अपने आवास पर छोटे बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। धीरे-धीरे बच्चों की बढ़ती संख्या देखते हुए उन्होंने बाबतपुर में कुटुम्ब ग्राम की स्थापना की। यहां गरीब बच्चों के लिए पढ़ने के साथ रहने-खाने की मुफ्त व्यवस्था भी की। उनके कुटुम्ब ग्राम में करीब 45 गरीब बच्चे रह रहे हैं। डा. आशीष इन बच्चों को पारिवारिक परिवेश में शिक्षित करने में जुटे हैं। इन बच्चों को अपने खर्च पर स्कूल भी भेजते हैं। कुटुम्ब ग्राम में सुबह-शाम बच्चों की पढ़ाई के साथ अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी प्रशिक्षित करते हैं।’>>विशाल भारत संस्थान के डा. राजीव हैं कमजोर बच्चों की शिक्षा का सहारा11साक्षर इंडिया फाउंडेशन की स्वाति अपने वेतन से पढ़ाती हैं बच्चों को1वाराणसी : गरीब बच्चों को शिक्षा दान के लिए आर्य महिला पीजी कालेज की डा. स्वाति एस मिश्र व उनके पति डा. सुनील मिश्र ने वर्ष 2009 में साक्षर इंडिया फाउंडेशन गठित किया। इसके माध्यम से वह गरीब बच्चों को शिक्षित करने में जुटी हैं। वर्तमान में करीब 50 बच्चे उनके घर पढ़ने आते हैं। पांच से 15 वर्ष के इन बच्चों की, अपने वेतन से प्रारंभिक पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था के साथ स्कूली शिक्षा का भी इंतजाम कर रही हैं। अति गरीब बच्चों की फीस भी दंपती खुद भरता है। दोनों का जुनून यह कि जिले का हर बच्चा साक्षर बने और अपने पैरों पर खड़ा होकर सम्मानजनक जीवन जी सके।
