अब लिपिक पर कार्रवाई के लिए टिकी निगाहें
जागरण संवाददाता, सोनभद्र : प्रदेश में 16448 सहायक अध्यापकों की भर्ती के दौरान जिले में हुई फर्जी नियुक्ति के मामले में बीएसए अमरनाथ सिंह व मीरजापुर के बीएसए मनभरन राम राजभर को शासनस्तर से सोमवार को ही निलंबित कर दिया गया। इनके निलंबन के बाद अब इस फर्जीवाड़े के एक और आरोपी बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ सहायक के निलंबन पर सबकी निगाहें टिकी हुईं हैं। अब आशंका जतायी जा रही है कि अब तक कार्रवाई से बाहर रहे लिपिक को भी जल्द ही निलंबित किया जाएगा। 1शैक्षिक सत्र के आरंभ में ही प्रदेश में 16448 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई। भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष चलने की बजाय जिले में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने लगी। यहां के तत्कालीन बीएसए मनभरन राम राजभर ने अपने कार्यालय के वरिष्ठ सहायक देवेश नारायण शुक्ल के साथ मिलकर खेल किया और आठ शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति कर डाली। हालांकि उन्हें स्कूलों में तैनाती नहीं मिली थी। इसी बीच मनभरन राम राजभर का स्थानांतरण मीरजापुर जनपद के लिए कर दिया गया। यहां पर नए बीएसए के रूप में अमरनाथ सिंह आये। इस मामले की शिकायत कुछ अभ्यर्थियों ने जिलाधिकारी से की। उन्होंने एडीएम रामचंद्र को जांच अधिकारी नामित करते हुए जांच के लिए कहा। एडीएम ने जांच रिपोर्ट सौंपी तो उसमें पूरा मामला ही किताब के पन्ने की तरह खुल गया। एडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में रश्मि तिवारी निवासी कौशांबी, अंशू देवी निवासी फतेहपुर, राधेश्याम निवासी कौशांबी, रीनू देवी निवासी कौशांबी, उपेंद्र निवासी कौशांबी, अंजु सिंह निवासी कानपुर नगर, मंजू देवी निवासी फतेहपुर व नीलू देवी निवासी फतेहपुर की नियुक्ति को फर्जी करार देते हुए नियुक्ति एवं पदस्थापन निरस्त करने की संस्तुति की गई थी। इसके साथ ही तत्कालीन बीएसए मनभरनराम राजभर, वर्तमान बीएसए अमरनाथ सिंह व कार्यालय के वरिष्ठ सहायक देवेश नारायण शुक्ल के खिलाफ आपराधिक व अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की। इसके बाद 26 मार्च को फर्जी नियुक्ति पाये शिक्षकों का पदस्थापन निरस्त कर दिया गया था। इस पूरे मामले को सबसे पहले दैनिक जागरण ने 29 नवंबर को खबर प्रकाशित करके मामले को उठाया था। 1कैसे-कैसे हुआ था फर्जीवाड़ा1 823 पदों के लिए हुई काउंसिलिंग प्रक्रिया में कुल 810 चयनित अभ्यर्थियों में से 760 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र 31 अगस्त 2016 को जारी कर दिया गया। शेष 50 अभ्यर्थी जो डीएड डिग्रीधारी हैं उनका मामला न्यायालय में होने की वजह से उनकी सीट आरक्षित कर दी गई। शेष बचे 13 पद जिसमें नौ पद अनुसूचित जनजाति, तीन अनुसूचित व एक अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए रिक्त एवं प्रतीक्षारत रखा गया। इसी बीच तत्कालीन बीएसए मनभरन राम राजभर और लिपिक देवेश नारायण शुक्ल ने बिना चयन समिति के अध्यक्ष व सदस्यों के अनुमोदन के ही आठ और शिक्षकों की नियुक्ति कर डाली। इसी बीच तत्कालीन बीएसए मनभरन राम राजभर का स्थानांतरण मीरजापुर के लिए कर दिया गया। जांच अधिकारी ने इस पूरे मामले में तत्कालीन बीएसए, वर्तमान बीएसए व लिपिक को भी दोषी माना।जागरण संवाददाता, सोनभद्र : प्रदेश में 16448 सहायक अध्यापकों की भर्ती के दौरान जिले में हुई फर्जी नियुक्ति के मामले में बीएसए अमरनाथ सिंह व मीरजापुर के बीएसए मनभरन राम राजभर को शासनस्तर से सोमवार को ही निलंबित कर दिया गया। इनके निलंबन के बाद अब इस फर्जीवाड़े के एक और आरोपी बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ सहायक के निलंबन पर सबकी निगाहें टिकी हुईं हैं। अब आशंका जतायी जा रही है कि अब तक कार्रवाई से बाहर रहे लिपिक को भी जल्द ही निलंबित किया जाएगा। 1शैक्षिक सत्र के आरंभ में ही प्रदेश में 16448 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई। भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष चलने की बजाय जिले में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने लगी। यहां के तत्कालीन बीएसए मनभरन राम राजभर ने अपने कार्यालय के वरिष्ठ सहायक देवेश नारायण शुक्ल के साथ मिलकर खेल किया और आठ शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति कर डाली। हालांकि उन्हें स्कूलों में तैनाती नहीं मिली थी। इसी बीच मनभरन राम राजभर का स्थानांतरण मीरजापुर जनपद के लिए कर दिया गया। यहां पर नए बीएसए के रूप में अमरनाथ सिंह आये। इस मामले की शिकायत कुछ अभ्यर्थियों ने जिलाधिकारी से की। उन्होंने एडीएम रामचंद्र को जांच अधिकारी नामित करते हुए जांच के लिए कहा। एडीएम ने जांच रिपोर्ट सौंपी तो उसमें पूरा मामला ही किताब के पन्ने की तरह खुल गया। एडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में रश्मि तिवारी निवासी कौशांबी, अंशू देवी निवासी फतेहपुर, राधेश्याम निवासी कौशांबी, रीनू देवी निवासी कौशांबी, उपेंद्र निवासी कौशांबी, अंजु सिंह निवासी कानपुर नगर, मंजू देवी निवासी फतेहपुर व नीलू देवी निवासी फतेहपुर की नियुक्ति को फर्जी करार देते हुए नियुक्ति एवं पदस्थापन निरस्त करने की संस्तुति की गई थी। इसके साथ ही तत्कालीन बीएसए मनभरनराम राजभर, वर्तमान बीएसए अमरनाथ सिंह व कार्यालय के वरिष्ठ सहायक देवेश नारायण शुक्ल के खिलाफ आपराधिक व अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की। इसके बाद 26 मार्च को फर्जी नियुक्ति पाये शिक्षकों का पदस्थापन निरस्त कर दिया गया था। इस पूरे मामले को सबसे पहले दैनिक जागरण ने 29 नवंबर को खबर प्रकाशित करके मामले को उठाया था। 1कैसे-कैसे हुआ था फर्जीवाड़ा1 823 पदों के लिए हुई काउंसिलिंग प्रक्रिया में कुल 810 चयनित अभ्यर्थियों में से 760 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र 31 अगस्त 2016 को जारी कर दिया गया। शेष 50 अभ्यर्थी जो डीएड डिग्रीधारी हैं उनका मामला न्यायालय में होने की वजह से उनकी सीट आरक्षित कर दी गई। शेष बचे 13 पद जिसमें नौ पद अनुसूचित जनजाति, तीन अनुसूचित व एक अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए रिक्त एवं प्रतीक्षारत रखा गया। इसी बीच तत्कालीन बीएसए मनभरन राम राजभर और लिपिक देवेश नारायण शुक्ल ने बिना चयन समिति के अध्यक्ष व सदस्यों के अनुमोदन के ही आठ और शिक्षकों की नियुक्ति कर डाली। इसी बीच तत्कालीन बीएसए मनभरन राम राजभर का स्थानांतरण मीरजापुर के लिए कर दिया गया। जांच अधिकारी ने इस पूरे मामले में तत्कालीन बीएसए, वर्तमान बीएसए व लिपिक को भी दोषी माना।
