सरकार की पहल कामयाब रही तो देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की ग्रेडिंग की प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी। नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडेशन काउंसिल (नैक) की ओर से अपने इंस्पेक्टर भेजकर जांच करवाने की मौजूदा प्रक्रिया को बदलकर अब इसमें तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इसके तहत संस्थान को संबंधित आंकड़े वेबसाइट पर डालने को कहा जाएगा। 1केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री प्रकाश
जावड़ेकर का दावा है कि नई व्यवस्था तीन महीने के अंदर शुरू हो जाएगी। इस समय महज तीन हजार संस्थान ही नैक की इस स्वैच्छिक ग्रेडिंग के लिए आगे आते हैं, जबकि देश में 38 हजार कॉलेज हैं। नैक ने उच्च शिक्षण संस्थानों की ग्रेडिंग के लिए नया ‘क्वालिटी इंडिकेटर फ्रेमवर्क’ (क्यूआइएफ) तैयार कर लिया है। इसे प्रयोग के तौर पर देश के विभिन्न इलाकों और विभिन्न स्तर के दो सौ संस्थानों में शुरू भी किया गया है। अंतिम रूप देने से पहले मंगलवार को इस पर राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित की गई थी। बैठक के दौरान जावड़ेकर ने नई व्यवस्था को लागू करने के लिए अधिकारियों को 15 अगस्त तक की समय सीमा दी है। नई व्यवस्था के बारे में जावड़ेकर कहते हैं, ‘नैक की इंस्पैक्शन टीम बहुत सी संस्थाओं तक पहुंच नहीं पाती थी। ऐसे में व्यवस्था को आंकड़ों पर ज्यादा निर्भर बनाया जाएगा। आंकड़ों की प्रमाणिकता की जांच करने के लिए पूरी व्यवस्था होगी जो पूरी तरह पारदर्शी होगी। नई व्यवस्था में आंकड़े और निरीक्षण दोनों का मिश्रण होगा।’ जावड़ेकर ने यह भी कहा है कि ग्रेडिंग करने के काम के लिए आइआइटी जैसे संस्थान भी आगे आए। ताकि देश में नैक के अलावा भी कम से कम तीन-चार ग्रेडिंग एजेंसियां हो। 1मानवीय मूल्यों को भी तरजीह : नई ग्रेडिंग व्यवस्था में आकलन का तरीका ही नहीं बदलेगा, बल्कि पैमाने भी बदल जाएंगे। संस्थान में संबंधित विषय की पढ़ाई और ढांचागत सुविधाओं को तो महत्व दिया ही जाएगा, साथ ही इसकी ओर से सामाजिक उत्तरदायित्व, मानवीय मूल्यों और पेशेवर नैतिकता को दी जाने वाली अहमियत को भी एक प्रमुख आधार बनाया जाएगा। इसी तरह लैंगिक समानता, पर्यावरण जागरूकता और दिव्यांगों के लिए किए जा रहे प्रयास का भी आकलन किया जाएगा।1कैसे होती है ग्रेडिंग : वर्ष 1994 में शुरू किया गया नैक अभी कॉलेज व विश्वविद्यालयों को आठ श्रेणियों में बांटता है। पहली श्रेणी ‘ए प्लस प्लस’ है जिसमें उन संस्थान को रखा जाता है जो इनके आकलन में 3.76 से 4 सीजीपीए तक पाते हैं। इसके नीचे ‘ए प्लस’, ‘ए’, ‘बी प्लस प्लस’, ‘बी प्लस’, ‘बी’ और ‘सी’ श्रेणियां हैं। जबकि 1.5 सीजीपीए से कम पाने वाले संस्थान को ‘डी’ श्रेणी में रखा जाता है, यानी जिन्हें एक्रीडेशन नहीं दिया गया। 1नई व्यवस्था आंकड़ों पर आधारित, तकनीकी रूप से सक्षम, वस्तुनिष्ठ, पारदर्शी, उपयोग में आसान और ज्यादा व्यापक है। इसका मुख्य फोकस पारदर्शिता और तटस्थता लाना है। 1प्रो. डीपी सिंह, निदेशक, नैक1
जावड़ेकर का दावा है कि नई व्यवस्था तीन महीने के अंदर शुरू हो जाएगी। इस समय महज तीन हजार संस्थान ही नैक की इस स्वैच्छिक ग्रेडिंग के लिए आगे आते हैं, जबकि देश में 38 हजार कॉलेज हैं। नैक ने उच्च शिक्षण संस्थानों की ग्रेडिंग के लिए नया ‘क्वालिटी इंडिकेटर फ्रेमवर्क’ (क्यूआइएफ) तैयार कर लिया है। इसे प्रयोग के तौर पर देश के विभिन्न इलाकों और विभिन्न स्तर के दो सौ संस्थानों में शुरू भी किया गया है। अंतिम रूप देने से पहले मंगलवार को इस पर राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित की गई थी। बैठक के दौरान जावड़ेकर ने नई व्यवस्था को लागू करने के लिए अधिकारियों को 15 अगस्त तक की समय सीमा दी है। नई व्यवस्था के बारे में जावड़ेकर कहते हैं, ‘नैक की इंस्पैक्शन टीम बहुत सी संस्थाओं तक पहुंच नहीं पाती थी। ऐसे में व्यवस्था को आंकड़ों पर ज्यादा निर्भर बनाया जाएगा। आंकड़ों की प्रमाणिकता की जांच करने के लिए पूरी व्यवस्था होगी जो पूरी तरह पारदर्शी होगी। नई व्यवस्था में आंकड़े और निरीक्षण दोनों का मिश्रण होगा।’ जावड़ेकर ने यह भी कहा है कि ग्रेडिंग करने के काम के लिए आइआइटी जैसे संस्थान भी आगे आए। ताकि देश में नैक के अलावा भी कम से कम तीन-चार ग्रेडिंग एजेंसियां हो। 1मानवीय मूल्यों को भी तरजीह : नई ग्रेडिंग व्यवस्था में आकलन का तरीका ही नहीं बदलेगा, बल्कि पैमाने भी बदल जाएंगे। संस्थान में संबंधित विषय की पढ़ाई और ढांचागत सुविधाओं को तो महत्व दिया ही जाएगा, साथ ही इसकी ओर से सामाजिक उत्तरदायित्व, मानवीय मूल्यों और पेशेवर नैतिकता को दी जाने वाली अहमियत को भी एक प्रमुख आधार बनाया जाएगा। इसी तरह लैंगिक समानता, पर्यावरण जागरूकता और दिव्यांगों के लिए किए जा रहे प्रयास का भी आकलन किया जाएगा।1कैसे होती है ग्रेडिंग : वर्ष 1994 में शुरू किया गया नैक अभी कॉलेज व विश्वविद्यालयों को आठ श्रेणियों में बांटता है। पहली श्रेणी ‘ए प्लस प्लस’ है जिसमें उन संस्थान को रखा जाता है जो इनके आकलन में 3.76 से 4 सीजीपीए तक पाते हैं। इसके नीचे ‘ए प्लस’, ‘ए’, ‘बी प्लस प्लस’, ‘बी प्लस’, ‘बी’ और ‘सी’ श्रेणियां हैं। जबकि 1.5 सीजीपीए से कम पाने वाले संस्थान को ‘डी’ श्रेणी में रखा जाता है, यानी जिन्हें एक्रीडेशन नहीं दिया गया। 1नई व्यवस्था आंकड़ों पर आधारित, तकनीकी रूप से सक्षम, वस्तुनिष्ठ, पारदर्शी, उपयोग में आसान और ज्यादा व्यापक है। इसका मुख्य फोकस पारदर्शिता और तटस्थता लाना है। 1प्रो. डीपी सिंह, निदेशक, नैक1
