सोनभद्र : नए शिक्षण सत्र में पुरानी किताबों से पढ़ेंगे सरकारी स्कूलों के बच्चे

सोनभद्र : एक तरफ कान्वेंट स्कूलों के बराबर सरकारी विद्यालयों को लाने की बात प्रदेश सरकार कर रही है वहीं दूसरी तरफ इन सरकारी विद्यालयों में मूलभूत व्यवस्था भी पूर्ण करने में प्रदेश सरकार नाकाम दिख रही है। सरकारी स्कूल हो या अस्पताल इनकी व्यवस्था चाक-चौबंद करने के लिए सरकारें तमाम तरह के दावे करती हैं, लेकिन स्थिति यह हो गई है कि इन संस्थानों को प्रमोट करने के लिए कोर्ट को भी समय-समय पर दखल देना पड़ रहा है। बावजूद इसके नीति नियंताओं पर इसका कोई खासा असर नहीं दिख रहा है। जिसका हश्र है कि नए शिक्षण सत्र में भी बच्चे पुरानी किताबों से ही पढ़ेंगे। 1 कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों का नया शिक्षा सत्र एक अप्रैल से चालू हो रहा है। जहां एक तरफ प्राइवेट स्कूल नए शिक्षा सत्र को लेकर सभी तैयारी पूरी कर ली है तो वहीं दूसरी तरफ शिक्षा निदेशक (बेसिक) डा. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने बीएसए को पत्र जारी कर नए शिक्षा सत्र में पुराने पाठ्यक्रम पर अध्ययन कार्य प्रारंभ करने का निर्देश दिया है। जारी पत्र में कहा गया है कि नवीन पाठ्य पुस्तकों के मुद्रण में हो रहे विलंब को ध्यान में रखते हुए शैक्षिक सत्र 2017-18 में कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्रओं को वितरित की गई पाठ्य पुस्तकों को नवीन पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध होने तक अंतरिम व्यवस्था के तहत विद्यालय में जमा कराकर एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए शिक्षा सत्र में छात्रों में वितरित कराकर पठन-पाठन प्रारंभ कराया जाय। 1 कहा गया है कि नवीन पाठय पुस्तकें उपलब्ध होने पर शैक्षिक सत्र 2018-19 के छात्र-छात्रओं को उपलब्ध कराई जाएंगी। इस आदेश के बाद सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों के छात्रों के भविष्य को लेकर कितनी सजग है।

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