डीएम दफ्तर का वाटर प्यूरीफायर निकाल बालिका विद्यालयों में लगाने के आदेश पर स्टे

प्रदेश के सभी राजकीय बालिका विद्यालयों में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को जानकारी दी गई कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के उस हिस्से पर रोक लगा दी है. जिसमें हाईकोर्ट ने 21 सितम्बर को दिए अपने आदेश में एक माह के अन्दर राजकीय बालिका विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर न लगाने पर डीएम दफ्तर और आवास का प्यूरीफायर निकालकर बालिका विद्यालयों में लगाने का आदेश दिया था.

कोर्ट में सभी जिलों के जिलाधिकारियों ने हलफनामा दाखिल कर कहा था कि उनके पास राजकीय बालिका विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर लगाने के लिए बजट की व्यवस्था नहीं है. जिस पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए ये आदेश दिया था.

हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेश के उस हिस्से पर स्टे लगाते हुए बड़ी राहत दी है.

वहीं मामले की सुनवाई के दौरान अपर मुख्य सचिव की ओर से कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर जानकारी दी गई कि जौनपुर, अलीगढ़ और श्रावस्ती जिलों के राजकीय बालिका विद्यालयों में पेयजल का सैम्पल की जांच करायी गई है. हलफनामे में कहा गया है कि जांच में पानी पीने योग्य पाया गया है.

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करने और हलफनामा दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय भी मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी. बलिया के याचिकाकर्ता विनोद कुमार सिंह ने याचिका दाखिल कर राजकीय बालिका विद्यालयों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है. मामले की सुनवाई जस्टिस अरुण टण्डन और जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की खण्डपीठ कर रही है।

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